चिता की भस्म के अभाव में कैसे भस्म मिलती है।
भस्म आरती के लिए चिता की भस्म जरूरी होती है। लेकिन शमशान घाट में रोज चिता जले, जरूरी नहीं है।कभी ऐसा नहीं हो पाता तब ऐसे में भस्म आरती के लिए भस्म कहां से लाई जाये। इसका उपाय पंडितो ने इस प्रकार निकाला.
ऐसे समय में गाय का गोबर ,पीपल ,पाखड़,रसाला ,बेलपत्र ,केले के पत्तो को को जला कर भस्म तैयार की जाती है। उसे अच्छी तरह कपड़े में छाना जाता है। उसके बाद एक पतले कपड़े में रखकर शिवलिंग पर उससे भस्म छिडकी जाती है।
शिवजी की सज्जा से पहले उन्हें पंचामृत से स्नान करवाया जाता है। पंचामृत में पांचो वस्तुओ से अलग -अलग नहलाया जाता है जैसे एक बार गाय के दूध से। दूसरी बार शहद से। तीसरी बार दही से। चौथी बार घी से. पांचवी बार गन्ने के रस या चीनी से स्नान करवाया जाता है। इन सबका इस्तेमाल करने के बाद उन्हें जल से स्नान करवाया जाता है। उनकी सारी सज्जा तभी पूरी मानी जाती है जब उसपर भस्म डाली जाती है। यहां के शिवलिंग पर इंसान की शक्ल उकेरी जाती है।
महाकालेश्वर के शिवलिंग पर शिवजी का मुख बनाया जाता है महाकालेश्वर के विकराल रूप का अनेक रंगो से चित्रण किया जाता है उनपर चांदी और फूलो से सज्जा की जाती है। .यहां शिवजी का सौम्य रूप नहीं दिखाया जाता है। बल्कि शिवजी का गुस्से में भरा हुआ रौद्र रूप दिखाया जाता है।जिनकी पत्नी ने आत्मदाह किया है। जो सर्वशक्तिमान होते हुए भी उसे बचा नहीं सका।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें