#mahakaleshwar temple no need of special clothes

महाकालेश्वर मंदिर में विशेष कपड़ो में जाना जरूरी नहीं 


 महाकालेश्वर मंदिर की शरुरात  बहुत पहले हो जाती है। लेकिन उसके आरम्भिक दरवाजे तक बहुत समय लग जाता है। हमने जब इतनी दूर दरवाजा देखा हमारी हिम्मत पस्त  हो गई। हमने विशेष दर्शन करने के बारे में सोचा। क्योंकि इतनी दूर जाने के बाद वापस आना उसके बाद चलना हमारे बस का नहीं था। 

            दिल्ली में रहते हुए पैदल चलने की आदत खत्म हो गई है। क्योंकि अपनी गाड़ी से नहीं चलना चाहे तब भी बाहर निकलते ही बहुत सारी  गाड़ियां मिल जाती है। ये हमारे बजट के अंदर ही होती है। इसलिए पैदल चलने की इच्छा हो नहीं पाती  है। जब पैदल नहीं चलते तब सहनशक्ति पनप नहीं पाती। हम जल्दी हांफने लगते है और घबराहट होती है। इसलिए पैदल लम्बी दूरी तय करने वालो से जलन होती है। 

     विशेष दर्शन की टिकट 250 /- की थी। उसे लेने के बाद हमने छोटा रास्ता तय किया। लेकिन वह भी बहुत लम्बा था।  लेकिन उसके लिए हम जल्दी से मुख्य  मंदिर तक पहुंच गए। वहां पर अलग- अलग  पूजा के तरीको के हिसाब से विशेष पैसे लगते है। 

        हमने विशेष रूप से सुना था आदमी धोती के बिना और औरते बिना साड़ी  के अंदर नहीं जा सकती। तो मैंने भी विशेष रूप से साड़ी  पहनी। अब रोजमर्रा में साडी पहनने की आदत नहीं रही। इसलिए इतनी गर्मी में साड़ी  पहनना अच्छा नहीं लग रहा था। इसलिए मै  आपसे कहना चाहूंगी आदमियों के लिए धोती और औरतो के लिए साड़ी  पहनना जरूरी नहीं है।  वहां दूसरे कपड़े पहनने वालो को दर्शन करने से कोई मना  नहीं करता। बल्कि अंदर की सुरक्षा कर्मचारी भी साडी   में रहना जरूरी नहीं   है। वे भी अपनी मर्जी के अनुसार कपड़े पहने हुए थी। 

       इसलिए आपसे कहना चाहूंगी अपनी सुविधा अनुसार कपड़े पहने। परेशान होने की जरूरत नहीं है। 

    

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