#BHASM AARTI IN UJJAIN

                      भस्म आरती का महत्व 


 उज्जैन का प्राचीन नाम अवन्तिपुर या अवंतिका भी है। उज्जैन विशेष रूप से मंदिरो  के लिए प्रसिद्ध है। आप उज्जैन के रेलवे स्टेशन पर जब भी जाओगे तब अधिकतर यात्री आपको महाकालेश्वर मंदिर से आये हुए दिखाई देंगे। उनके माथे पर लगा हुआ टीका  इसका सबूत होता है। मैंने इससे पहले इतना अधिक टीके  का इस्तेमाल होते हुए किसी अन्य तीर्थस्थान पर नहीं देखा। यहाँ आने वाले 90 % लोग विशेष तिलक लगवाते है। उन्हें देखते ही पहचान हो जाती है। ये कहाँ से आये है। किसी अन्य स्थान पर मुझे ऐसा देखने को नहीं मिला। 

        उज्जैन में मुख्य रूप से लोग भस्म -आरती देखने आते है। उसके लिए आप आने से पहले रजिस्ट्रेशन करवा कर निश्चित तिथि को आये तब आपका समय बच जायेगा वरना  आपको जिस दिन आये है उस दिन 12  बजे से पहले उसका विशेष स्थान पर रजिस्ट्रशन करवाना पड़ेगा। उसके अगले दिन ही आपको आरती में शामिल होने का मौका मिलेगा। इसलिए इक दिन अधिक का ध्यान रखने पर दर्शन कर सकोगे। 

    भस्म आरती के लिए 1  बजे से पंक्तियाँ लगनी शुरू हो जाती है। जबकि भस्म -आरती का समय सुबह चार बजे है। उसके लिए आपको अपना ID  कार्ड  अवश्य साथ रखना पड़ेगा। वरना  प्रवेश नहीं मिलेगा। भस्म आरती के समय सीमित  लोगो को प्रवेश दिया जाता है। लोग यहां विशेष रूप से भस्म -आरती देखने के लिए उत्सुक होते है। जबकि दिन में कई  बार आरती होती है। लेकिन जितनी उत्सुकता भस्म -आरती की होती है। उतनी उत्सुकता किसी अन्य आरती की नहीं होती। 

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