#indore ka khajrana mandir

                 इंदौर का  खजराना मंदिर

         

       

 इंदौर में खजराना मंदिर  गणेश जी का प्रसिद्ध मंदिर है। यह बहुत बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है।  दिल्ली में इतनी  बड़ी जगह में फ़ैले  हुए बहुत कम  मंदिर है। ये बहुत सूंदर है। साथ ही इसमें आने पर सबकी मनोकामना पूरी हो जाती है।
            खजराना मंदिर में मन्नत पूरी होने पर तोल  के हिसाब से प्रसाद चढ़ाया जाता है। जिसका मतलब है जिसकी मन्नत पूरी हो गई है उसके वजन के तोल के हिसाब से प्रसाद बांटा  जाता है। 
           किसी पूजा से पहले गणेश जी के पास निमंत्रण भेजा जाता है। सबसे पहले इस मंदिर में निमंत्रण पत्र भेजने का रिवाज है जिससे कार्य निर्विघ्न पूरा हो जाये। कार्य पूरा होने के बाद गणेश जी के मंदिर के पीछे उल्टा स्वस्तिक बनाया जाता है। इससे पहले मेने उल्टा स्वस्तिक बनते  कभी नहीं सुना था। सारी  उम्र उल्टा स्वस्तिक का मतलब में अशुभ समझती थी। पहली बार उल्टा स्वस्तिक का मतलब कार्य पूरा होना   समझ में आया। 
        यहाँ इस मंदिर में तेंतीस छोटे मंदिर बने हुए है। जिसमे हर समय पूजा होती रहती है। लोगो का हजूम चारो तरफ फैला हुआ था। लेकिन नंगे पैर  चलने पर कहीं  गंदगी नजर नहीं आ रही थी। जमीन बिलकुल साफ थी। साथ ही किसी भी ऊँची जगह  हाथ   रखने  पर भी धूल -मिटटी का नामोनिशान नहीं था। 
           मैंने पहली बार नर्मदा मैया का मंदिर इसमें देखा। मुझे वहाँ  मगरमछ देखकर हैरानी हुई।क्योंकि मेरे अनुसार किसी देवता का वाहन मगरमछ नहीं था।  उसके बाद ऊपर नजर जाने पर नदी के रूप में  स्त्री  की मूर्ति देखने पर उसे देखती चली गई।
             सारा मंदिर सफ़ेद संगमरमर का बना था। दूर से देखने पर सफेदी के कारण दूर से जगमगा रहा था। शाम के समय विशेष रौशनी का आयोजन किया जाता है। जिसमे यह मंदिर अद्भुत लगता है। 
               ये पहला मंदिर देखा जो बहुत बड़े परिसर में फैला हुआ   था। इसमें   अनेक प्रसाद की दुकाने बनी  हुई थी।  गाड़िया खड़ी  करने के लिए बहुत बड़ी पार्किंग बनी  हुई थी। यह बहुत सूंदर मंदिर है। यहाँ आने पर तन और मन धन्य हो जाते है। 

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