इंदौर का इस्कॉन मंदिर
मुझे शुरू में समझ नहीं आता था। इस्कॉन का मतलब क्या होता है। सबसे पहले मैंने मथुरा का इस्कॉन मंदिर देखा था। तब मै छोटी थी। वहां की मूर्तियां देखकर हैरान हो गयी थी। वे एकदम सजीब लग रही थी। वे सब संगमरमर की थी। वहां काम करने वाले लोग भी अधिकतर विदेशी थे। जिस कारण मै मूर्तियों और इंसानो में अंतर् नहीं कर सकी। उस समय इस्कॉन मदिर को लोग अंग्रेजो का मंदिर कहते थे। मुझे भी उस समय वह अंग्रेजो का मंदिर ही लगा था। इससे पहले इतनी सजीव मूर्तियां मैने पहले नहीं देखी थी। मै उन्हें देखकर हैरान हो गयी थी।
बहुत समय बाद मुझे पता चला ये कृष्ण भगवान का मंदिर है। इसका किसी विदेशी से नाता नहीं है। बल्कि इसके प्रचारक प्रभुपाद जी भारतीय थे। इस्कॉन का मतलब अन्तर्राष्ट्रीय कृष्ण चेतना समाज है। प्रभुपाद जी ने 59 की उम्र में अपने गुरु के आदेश पर कृष्ण के विचारो का प्रचार करने की शुरुरात की।
सबसे पहले उन्होंने अपने विचारो से अमरीका में हिप्पी लोगो को प्रभावित किया जो समाज के मापदंडो को खुद से दूर समझते थे। उनके अंदर बगावत की भावना आ गई थी। उन्होंने सारे सामाजिक मापदंडो के विरुद्ध चलना शुरू कर दिया था। घर छोड़ दिया था ,नशे में लत रहते थे। उन्हें किसी भी रूप में मानसिक शांति नहीं मिल रही थी। धीरे -धीरे वह समुदाय कृष्ण का मुरीद बन गया। उन्हें अपने हर सवाल का जबाब कृष्ण के चरणों में मिलने लगा।
70 के दशक में हिप्पी समस्या बनते जा रहे थे। जिन्हे कृष्ण के चरणों में आने पर शांति मिली। भारत के आलावा इस्कॉन मंदिर संसार के अधिकतर देशो में मिल जायेगा। इनके लगभग 900 के लगभग मंदिर बनाये जा चुके है। या बन रहे है।
इंदौर का इस्कॉन मंदिर अभी निर्माण की अवस्था में है। मुझे लगता है यह जल्दी पूरा हो जायेगा। इसमें पूजा -पाठ होते है। लोग मन की शांति के लिए मंदिर जाने लगे है।
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