एक सूत्र में बांधने वाला गोलगप्पा 
गोलगप्पे भारत के अधिकतर भागो में मिल जाते है। बस उनका तरीका अलग -अलग होता है। दिल्ली जैसे शहरो में गोलगप्पे वाला अपने हाथ से पानी में डुबो कर खिलाता है। दिल्ली जैसे शहरो में पानी को ठंडा रखने के लिए बर्फ का इस्तेमाल होता है। अब जब से महगाई बड़ी है तब से गोलगप्पो में चने का इस्तेमाल होना बंद हो गया है। जबकि पहले आलू के साथ चने का भी इस्तेमाल होता था। खट्टी या मीठी चटनी के साथ गोलगप्पे खाने का मजा अनोखा होता है।
तो कही पर गोलगप्पो में आलू भरकर एक प्लेट में सजाकर उसमे पानी भरकर रख देते है जिनके कुरकुरे पन के खत्म होने से पहले उनका खाना जरूरी होता है। वरना वो रोटी जैसे बन जायेंगे।
मेने इंदौर में पानी भरे गोलगप्पे के ऊपर बारीक़ सेब डाले हुए देखे। पहले मै समझ नहीं सकी ये पापड़ी की चाट है या गोलगप्पे है। .उन्हें खाने के बाद मुझे गोलगप्पे का पानी अलग से लेना पड़ा क्योंकि गोलगप्पे के पानी का स्वाद ही मुझे लुभाता है।इतने कम पानी से मेरा गुजारा नहीं हुआ।
आपने कभी गर्म गोलगप्पे खाये है एक बार आपको यकीन नहीं हुआ। क्योंकि मैंने गर्म गोलगप्पे मणिपुर और अंडमान -निकोबार द्वीपसमूह में खाये थे। कहाँ बर्फ के गोलगप्पे खाने वालो को गर्म पानी के गोलगप्पे खाने को मिले कैसा लगता होगा ?सोच कर देखीये। हर जगह गोलगप्पे बेचने का तरीका आपकी जेब के अनुसार बदलता है।यानी उसकी कीमत में बदलाव आता है।
बनारस जैसी जगह पर छह तरह के पानी के साथ गोलगप्पे का मजा लेना बिलकुल नया अनुभब था। अब दिल्ली में भी तीन चार तरह के गोलगप्पे के पानी मिलने लगे है। लेकिन मेने छह तरह के पानी के साथ केवल बनारस में गोलगप्पे खाये थे।
मुझे जैसे गोलगप्पे के चाहने वाले और भी होंगे जो जहां भी जाये गोलगप्पे का मजा लेना नहीं भूलते है।
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