उज्जैनी उर्फ़ कनकश्रृंगा
उज्जैन का एक अन्य नाम कनकश्रृंगा है। इसका मतलब सोने के शिखरों वाली . . कल मेने आपको बताया था। समुद्र मंथन के बाद देवताओ और दैत्यों के बीच 14 रत्नो का बंटवारा इसी नगरी में हुआ था। यहां के लोगो ने सम्पन्न जीवन जिया था। यहां बड़े -बड़े महल बने हुए थे। उन महलो के शिखरों पर सोने के कलश बने हुए थे। उस पर पड़ती सोने की किरणों के कारण पूरी नगरी सोने जैसी जगमगा उठती थी। जिसके कारण इसका नाम कनकश्रृंगा पड़ गया था।
स्कन्द पुराण के अवन्ति खंड के अध्याय 40 में कनकश्रृंगा नाम से संबंधित कथा है। जो इस प्रकार है- इस नगरी में विष्णु को शिव तथा ब्रह्मा ने प्रणाम करके यहां निवास करने की इच्छा बताई। तब विष्णु ने इस नगरी के उत्तर में ब्रह्मा को तथा दक्षिण में शिव को रहने के लिए स्थान दिया। ब्रह्मा ने इस नगरी को कनकवर्ण के श्रृंगो वाली कहा था इसलिए इसका नाम तभी से कनकश्रृंगा पड़ गया। भले ही आज लोग इस नाम का इस्तेमाल नहीं करते लेकिन ये नाम इसके समृद्ध इतिहास को बताता है। यानि यहाँ के अधिकतर लोग धनवान थे।
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