#ujjain banam kushsthali

                           उज्जैन बनाम  कुशस्थली 

     

  स्कंदपुराण के अवन्तिखंड के 42  अध्याय के अनुसार -ब्रह्मा  ने सम्पूर्ण संसार को बना दिया। तब संसार की रक्षा का काम विष्णु को सौंप दिया क्योंकि विष्णु जगत के पालनकर्ता है। इस पुरे संसार में विष्णु को रहने के लिए उज्जैन  ही सही लगा। तब ब्रह्मा ने इस स्थान को आरामदायक बनाने के लिए  कुशो से ढक  दिया और     विष्णु से यहां रहने की प्रार्थना की.                  
            कुश का मतलब एक विशेष प्रकार की घास होती है।यह पवित्र घास होती है इस घास का प्रयोग देवताओ और ऋषियों के बैठने के लिए प्रयोग किया जाता है। आजकल भी पूजा -हवन के समय कुशा का इस्तेमाल होता है। यह शुरुरात में विष्णु के प्रयोग के लिए इस्तेमाल की गयी थी। बाद में जो चीज देवताओ को पसंद होती है। उसे सभी लोग पसंद करने लगते है। इसलिए इसका विशेष स्थान बन गया है।   
       यह जगह कुश से ढकी होने के कारण कुशस्थली कहलाने लगी। यह पवित्र क्षेत्र कहलाता है। यहाँ पर देवताओ का निवास होने के कारण इस क्षेत्र का महत्व बढ़  गया है। एक प्रकार से यह बाद में  मंदिरो की नगरी बन गयी है। 

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