इंदौर का रजवाड़ा पैलेस
इंदौर का राजवाड़ा महल बहुत सूंदर है। इसे देखकर आँखे खुली रह जाती है। इसे बनाने में पत्थरो और लड़की का बहुत अधिक इस्तेमाल किया गया है।
राजसी शानोशौकत की मिसाल है। यह दो बार बुरी तरह जल चुका है। लेकिन इसे उसी ततपरता से दुबारा ठीक करवा दिया गया है। इस समय भी इसका पुनर्निर्माण करवाया जा रहा है। मुझे लगता है यह महल हमेशा अपनी शानोशौकत को बनाये रखने में लगा रहता है। भव्य निर्माण कला.वास्तुशिल्प ,सूंदर गलियारे मन में अनोखा एहसास जगाते है। इसे मलहार राव होल्कर ने बनाना शुरू करवाया था। इसे बनाने में बहुत सारे राजाओ का योगदान रहा है।
यहाँ की एकमात्र महारानी अहिल्याबाई होल्कर की छाया भी इसमें दिखाई देती है। इस महल में विशेष रूप से बहुत बड़े मंदिर का निर्माण करवाया गया है। यहां आत्मिक शांति का अनुभव होता है।जिस रानी ने जवानी में पति खो दिया। बड़े होने पर बेटे का बिछोह सहना पड़ा। शादी के बाद बेटी की मृत्यु का अथाह दुःख सहना पड़ा। ऐसे इंसान को भगवान की शरण में शांति मिलती है।
इतने अधिक दुःख में डूबी कितनी रानियों के नाम आपने सुने होंगे। जो इन दुखो के बाबजूद अपने कर्तव्य पथ पर चलती रही अपने दुखो के लिए किसी को दोष देने की जगह भगवान से सबके सुखो की विनती करती रही। ऐसी रानी का मंदिर भी उतना भव्य है
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें