# sjaye -maut

      सविता ने एक दिन बताया- उसके गाँव  में एक लड़के और एक लड़की को उसके घर वालो ने जान से मार दिया है।
   हमें बहुत हैरानी हुई। हम समझ नही सके कि अभिभावक अपने बच्चो को कैसे मार सकते है। हमारे मुँह  से एकदम निकल गया। " ऐसा कैसे हो सकता है। तुमने कुछ गलत सुन लिया होगा। "
   सविता बोली -मेने कुछ भी गलत नही सुना बल्कि मै  उस लड़की और लड़के को अच्छी तरह जानती हूँ। वे मेरे पडोसी थे। उनके घर मेरा आना -जाना था। उन दोनों की जाति  अलग थी। उसके बाबजूद दोनों में प्यार हो गया। उन्होंने छुप के शादी कर ली। उनके परिवार बालो को जब पता चला। उन्हें ये रिश्ता बर्दास्त नही हुआ।  दोनों पर पावंदी लगा दी गयी। पर उन्होंने अपने प्यार को  भुलाने  के स्थान पर मरना पसंद किया  सभी ने कई  तरह से उन्हें समझाने  की कोशिश की। उन दोनों पर  चाहत  का नशा ऐसा चढ़ा था कि उनपर ज़माने की ज्यादतियों का कोई असर नही हुआ । वे ज़माने के गुस्से के सामने डटकर खड़े हो गए।हमारे गाव के लोग भड़क उठे। उन्होंने उनका मर जाना ही उचित समझा। एक दिन लड़की के परिवार वालो ने उनके खाने में जहर मिला दिया।  वह   मौत की गहरी नीद सो गये  ।
    सब उसकी ये  बात  सुनकर चकित रह गये।   आज के ज़माने  में किसी को उनके परिवार ने मौत  की नींद  सुला दिया। हमें बहुत ताज्जुब हुआ।
  रेशमा बोली -तुम्हारे गाँव में पुलिस  नही आई। उन लोगो को पुलिस पकड़ कर नही ले गयी।
   सविता बोली -पुलिस की क्या विसात जो हमारे गाँव  से किसी को पकड़ के  ले  जाये । सारे गाँव  में एका हो गया है इसलिए  हमारे गाँव  में किसी को नही पकड़ा गया। ना किसी की शिकायत हुई बल्कि लोग इस किस्से को मुछो पर ताब  दे कर सुना रहे है।
   मनोहर ने  मुझसे कहा  है -यदि तेरे बच्चो ने ऐसा कुछ किया तो मै उन्हें जहर दे दुँगा।
    सविता की चिंता का कारण शगुन थी क्योंकि  शगुन कॉलेज जाने लगी थी। अब वह अनेक लोगो से मिलेगी। उसे पवंदियो में रखना बहुत मुश्किल है ऐसे मै उसका प्रत्येक कदम उसे कहाँ  ले जाता है। कुछ    नही कहा जा सकता। जब से सविता ने इस बारे में सुना है। उसके होश गुम हो गए है। इंसान अपना जीवन तो दुसरो के मापदंड के हिसाब से जी सकता है। बच्चो को कैसे उन पवंदियो के बारे  में  समझाए। उसकी पढ़ाई छुड़वाना भी उचित नही है। वह बहुत परेशान हो गयी है।
   एक बार इंसान बेटे की गलती माफ़ कर सकता है। पर बेटियो की गलती माफ़ नही कर सकता  उसकी दो बेटिया है। उनका क्या होगा। शहरो के लोग इस तरह के माहौल में नही रहते। उसकी बेटियाँ भी शहरी जीवन जी रही है। वे गाँव की सख्तियो से अनजान है। उनकी सोच शहर में आकर बदल गयी तो क्या होगा। वो उन्हें अपने गाँव की सोच से अवगत करा पायेगी या  उसके बच्चे उसको गाँव के लोगो के सामने शर्मिंदगी का कारण बनबायेंगे।  कई  दिन से उसे रात  में सही से नीद नही आ  रही।
   हम शहरो में रहने वाले लोग उसकी मनोदशा का सही से अंदाजा नही लगा सके। इतने में रिया के मुँह  से मजाक में निकल गया -तेरे मनोहर को तीन को नही चार जनो को जहर देना पड़ेगा।  सबसे बड़ा कारण वो तुम्हे मानेगे। जिसके कारण बच्चे इस तरह का  कदम  उठा सके। यदि तूम  गाँव में रहती तो तुम दोनों की बराबर बच्चो को पालने की जिम्मेदारी होती। अब तुम अकेले बच्चे पाल  रही हो। वो कभी भी  हाथ झटक के कह  देंगे सब तेरे कारण हुआ है। तब तेरा सारा त्याग मिटटी में मिल जायेगा।
    रिया ने उसकी दुखती रग पर हाथ रख दिया था। सविता इस सच्चाई को सुनकर रुआँसी हो गयी।  

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