#manokamna

     सविता में आगे पढ़ने  की हिम्मत आ  गयी अगले दिन सविता ने मनोहर से  आगे पढ़ने की इच्छा जाहिर की । अब मनोहर ने कहा - तुम्हारी  पढ़ने की इच्छा अभी पूरी नही हुई  . मेने तुम्हे पढ़ने के कारण पुरे दिन थका हुआ देखा है  ।तुम्हे सोने का समय तक नही मिल पाता।  अब तुम आराम करो । घर को   सम्भालो।
          सविता ने कहा - मेंने  आपको अपने थकने के लिए कुछ कहा।  आप  मेरी ख़ुशी को भी महसूस करो।  मै
      पढ़ते  हुए अपनी सारी  थकान  भूल जाती हूँ।  पूरे  दिन मुझे याद भी नही आता  मेंने  कितना काम किया।
   मनोहर बोला -मेंने  रात  दिन तुम्हे काम करते हुए देखा है तुम्हारा कुम्हलाया चेहरा देखकर मुझे दुःख होता
है।
  सविता बोली - मै  सच में आगे पढ़ना  चाहती हूँ।  आप मुझ पर तरस  खाओ।  पढ़ना  मुझे सुख देता है।
  मनोहर ने कहा -तुम सच कह रही हो।  ठीक हे मै  तेरा 12 बी  में प्रवेश दिला  देता हूँ
 मनोहर ने सविता का प्रवेश दिला  दिया। अब सविता अपनी पढ़ाई  में ध्यान लगाने लगी।  इस तरह वह एक के बाद  एक क्लास पास करती चली गयी।  अब मनोहर को भी उसके पढ़ने  से कोई एतराज नही था। घर का काम सविता सुचारू रूप से कर रही थी।  वह पूरे समय काम में लगी रहती थी पर उफ़ तक नही करती थी। मनोहर उसकी जिजीविषा देखकर हैरान हो जाता था।  वह घर के काम के लिए ,शगुन के लिए , या पढ़ते  वक्त कभी भी मनोहर से मदद के लिए नही कहती थी  .
      ऐसे ही पढ़ते  हुए बी. ए ,एम ए ,बी ,एड   तक की पढ़ाई  पूरी कर ली  , अब सविता बहुत खुश थी जहाँ  तक पढ़ने  के बारे में उसने सोचा था। अब उसका सपना पूरा हो गया। 

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