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      सविता की मेहनत  रंग लाई  उसने डरते -डरते ११ वी  के पेपर दिए । उसे अपने ऊपर  विश्वास नही था क्योंकि पहली बार उसने बिना किसी की मदद के पढ़ाई  की थी । उसे लग रहा था । कही  वह फेल ना  हो जाए । क्योंकि वो एक बार भी विद्यालय नही गयी थी । उसने सारी  पढ़ाई  घर से की थी ।
     आज उसका परिणाम आना था उसका किसी काम में  मन नही लग रहा था उसका सारा ध्यान सिर्फ परिणाम पर लगा था । मनोहर कब घर आकर उसे उसका परिणाम बताएँगे । उसके परिणाम पर आगे का भविष्य निर्भर करता था । यदि वह पास हो गयी तो उसे आगे की पढ़ाई  का अवसर मिलेगा अन्यथा उसे पढ़ने का मौका नही मिलेगा । उसके पास दुबारा पास होने का मौका नही था । उसकी बरसो की इच्छा  मनोहर ने मान तो ली थी पर फेल होने पर दुबारा उसे दाखिला नही दिलवाया जायेगा ।
      मनोहर शाम के समय घर आये  । सविता का सारा दिन मनोहर का इंतजार करते हुए ही बीता  था । सविता मनोहर के चेहरे को देख कर समझने की कोशिश कर रही थी कि  परिणाम कैसा  रहा । पर मनोहर के चेहरे पर कोई ख़ुशी उसे दिखायी नही दी वह परेशान होकर उससे पूछ बेठी - आप मेरा परिणाम देखने गये  थे । क्या रहा ।
    मनोहर बोला - मै  थका हारा  घर आया हूँ  । तूने पानी के लिए पूछना भी जरूरी नही समझा । एकदम प्रश्न पूछना शुरू कर दिया ।
   सविता को अपनी गलती का अहसास हुआ वह रसोई में से गिलास में पानी ले आई । और मनोहर से  बोली - आप मेरी उतावली समझो । मुझे अपने परिणाम के बारे में जानने की बहुत  इच्छा थी । में सुबह से ही आपके आने का इंतजार कर रही थी । आपके बारे में सोच ही नही पाई  । आप बताओ आप के नाश्ते के लिए क्या लाऊ ।
     मनोहर हँस  पड़ा - आज तो बढ़िया सा कुछ बना दे । साधारण खाना नही चलेगा । तू पहला स्थान लेकर पास हुई  है ।
   सविता सन्न रह गयी उसे पास होने की उम्मीद नही थी जबकि वह बहुत अच्छे नंबर लेकर पास हो गयी थी उसने ख़ुशी -ख़ुशी मनोहर की  पसंद का खाना बनाया। तीनो ने खाना खा लिया तो सविता मनोहर से बोली - मेरा आज  मंदिर जाने का मन कर रहा है  । मेने मन्नत मांगी थी ।
     मनोहर ने अनमने मन से कहा - आज मन नही कर रहा कभी और चलेंगे ।
   सविता बोली - आप हमेशा  इतने बजे आओगे । हमेशा ही थके होगे । बाद में चलना है  तो आज ही क्यों नही चले ।
  सविता के काफी इसरार करने पर मनोहर उसके साथ मंदिर के लिए चल पड़ा । सविता को शाम की रौशनी , चारो  और की छटा आज बहुत सुहावनी लग रही थी । उसने श्रद्धा -भक्ति से  भगवान के  दर्शन करके प्रसाद चढ़ाया । ख़ुशी के अहसास के साथ घर वापिस आई । आज उसकी  बरसो की मनोकामना पूरी हुई  थी । 

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