सविता की डाइट की पढ़ाई पूरी हो गयी। उत्तर प्रदेश में असिस्टेंट टीचर की नौकरी निकली तो उसने उसके फार्म भर दिए। उसके पेपर देने के बाद परिणाम निकला तो वह हैरान रह गयी। उसकी पहली कोशिश में सफलता मिल गयी। वह बहुत खुश हुई। सारे लोग हैरान थे। इसने किस तरह से नौकरी प्राप्त कर ली। किसी को उससे अच्छी नौकरी की उम्मीद नही थी। उसकी मेहनत को सभी लोग नजरअंदाज कर रहे थे। कितनी विपरीत परिस्थितियों में उसने सफलता पाई थी।
ये कह रहे थे - ये औरत इतना पढ़ने का समय कहाँ से निकाल लेती है।
सविता की ये नौकरी दिल्ली में लगी थी। उससे पहले वह कभी दिल्ली जैसी जगह नही आई थी उसकी दुनिया केवल गाँव और सहारनपुर तक सीमित थी। नौकरी की ललक में उसने सोचा ही नही था। उसकी इतनी दूर नौकरी लगेगी। उसने अपने पति से इस बारे में बात करने की सोची। उसका सपना पूरा हो गया था। उसके पुरे होने के साथ कितनी सारी दूसरी दिक्क़ते पैदा हो जाएँगी ये तो वह सोच ही नही सकी।
उसकी ख़ुशी ज्यादा दिन तक नही रही। उस नौकरी पर स्टे लगा दिया गया उसकी सारी मेहनत बेकार चली गयी। वह फिर से दुःख में डूब गयी। उसे सारे काम करने के बाद पड़ने का समय मिलता था। पर विधाता इतना वाम हो गया था। कभी उसे लगता सारी मुश्किलें उसके जीवन में ही आएंगी। उसके जीवन में कभी सफलता भी लिखी है। या कुछ विशेष लोग ही सफलता के भागीदार होते है।उसकी निराशा कुछ ही समय में दूर हो गयी। उसके पास इतने सारे काम थे। उसने अपना मन उनमे लगा दिया। कुछ समय बाद फिर से टी,जी ,टी,की नौकरी निकली उसने फार्म भर दिया। उसकी तैयारियों में लग गयी। उसने पिछली बार की गलतियों से सबक लिया और सही तरीके से पढ़ाई की। वह हैरान रह गयी। उसका बहुत अच्छा रेंक आया था। उसकी सफलता पर सभी चकित थे।
ये कह रहे थे - ये औरत इतना पढ़ने का समय कहाँ से निकाल लेती है।
सविता की ये नौकरी दिल्ली में लगी थी। उससे पहले वह कभी दिल्ली जैसी जगह नही आई थी उसकी दुनिया केवल गाँव और सहारनपुर तक सीमित थी। नौकरी की ललक में उसने सोचा ही नही था। उसकी इतनी दूर नौकरी लगेगी। उसने अपने पति से इस बारे में बात करने की सोची। उसका सपना पूरा हो गया था। उसके पुरे होने के साथ कितनी सारी दूसरी दिक्क़ते पैदा हो जाएँगी ये तो वह सोच ही नही सकी।
उसके तीन बच्चो की जिम्मेदारी कैसे पूरी होगी। उसके पति उसके साथ दिल्ली चलकर रहेंगे या नहीं। वह दिल्ली में अकेली कैसे रह पायेगी। अकेले बच्चो की जिम्मेदारी कैसे निभाएगी। या बच्चो को पति के पास छोड़ा तो वे उन तीनो को कैसे संभाल पाएंगे। उसे पति से बात करते हुए भी डर लग रहा था। उसके पति उस पर गुस्सा उतारेंगे इसी उधेड़बुन में समय निकलता जा रहा था। वह खुद असमंजस में थी। करू तो क्या करू।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें