NIRNAY

       सविता ने मनोहर के आने पर अपनी दिल्ली की नौकरी की खबर दी। उस खबर को सुनकर मनोहर चुप हो गया।  उसे समझ नही आया  क्या जबाब दे। सविता को मनोहर की चुप्पी खल रही थी।
       उसने मनोहर पर दबाब डालते  हुए कहा -आप कुछ कहते क्यों नही।  मुझे आपकी चुप्पी खल रही है।
    मनोहर बोला -मुझे समझ नही आ  रहा इतनी दूर जाकर तुम कैसे अकेली रह   पाओगी। हमारी जान -पहचान का कोई रिश्तेदार भी वहाँ  नही रहता। मै  तुम्हारे लिए अपनी नौकरी नही छोड़ना चाहता। तुम परिवार के बिना इतने बड़े शहर में कैसे रह सकोगी। शहर में अच्छे खासे लोग बेबकूफ  बन जाते है। तुम तो घर की चारदीवारी से कभी अकेले बाहर नही निकली हो।  मै  तुम्हारे बारे में सोच कर कई दिन से परेशान हो रहाहूँ। में तुम्हारा दिल नही तोडना चाहता हूँ।  मेरी बेबसी मुझे खुश होने से रोक रही है।
    ये सारी  बाते  सविता को भी कई  दिन से डरा रही थी। लेकिन वह रोज अपने को मजबूत कर रही थी। में इस मौके  को नही छोडूंगी।
      वह सोचती -मेने कई बरसो की मेहनत के बल पर इस नौकरी को पाया हे यदि इस नौकरी को छोड़ दिया तो दुबारा ऐसी नौकरी नही मिलेगी। इतनी अच्छी नौकरी आज के समय में कितने लोगो को मिलती है।  मै  मजबूत औरत  बनूँगी।  में दुसरो का सहारा  बनूँगी। दुसरो की प्रेरणा बनूँगी।  इसके लिए मुझे अपने डर से आगे बढ़ना होगा।  यदि मेने  नौकरी छोड़ दी तो मै  हमेशा ऐसे बंद माहौल में ही रह जाउंगी। मेरी दो बेटिया भी ज्यादा तरक्की नही कर पायेगी। अब सविता ने अपने पति मनोहर को समझाने का मन बना लिया। ताकि उसके मन से उसको लेकर डर निकल जाये।
     मनोहर उसके समझाने  पर बोला -तुम सोचो अभी तक तुमने अकेले कभी कोई निर्णय नही लिया। वहाँ  जब अकेले रहोगी। तुम्हे सब कुछ अकेले करना पड़ेगा। मै हफ्ते में एक दिन आऊँगा। वहाँ आकर में तुम्हारी क्या मदद कर पाऊगा। तुम्हे अपने बेस पर सारे   निर्णय लेने होंगे। तुम किसी को दोष भी नही दे सकोगी।
     सविता बोली -आप परेशान ना हो। इस निर्णय के लिए में किसी को कभी दोष नही दूंगी। आप इसकी चिंता ना करे।
  मनोहर बोला -जैसी तेरी मर्जी तुझे अकेले ही दुनियाँ  से लड़ना होगा। यहाँ का कोई भी इंसान तेरी मदद के लिए वहाँ  नही होगा।
   अब अंतिम निर्णय हो चूका था। सविता दिल्ली के विद्यालय में अकेले ही नौकरी करने जाएगी। तीनो बच्चे उसके साथ अभी नही जायेंगे क्योंकि उनका एक साल बर्बाद हो जायेगा। उसे उस  माहौल में रहने के लिए नया अनुभव होगा। अभी तुम वहाँ  के  माहौल   के अनुसार अपने आप को बनाओ। बाद में बच्चो को लेजाना।सविता को मनोहर का  विचार   उचित लगा।  अब वो देहली आ गयी।  
                        

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