सविता जिस विद्यालय में नौकरी करने लगी वह गाँव का छोटा सा था। उस विद्यालय में नौकरी करने के बाद उसके सपने अब अच्छे और बड़े विद्यालय में नौकरी करने के लिए मचलने लगे । उसे पता चला बड़े विद्यालय में नौकरी कैसे मिलती है। अब वह बड़े विद्यालय में नौकरी करने की कोशिश करने लगी। उसे जब पता चला बड़े और सरकारी विद्यालय में नौकरी के फार्म भरे जाते है। उसके बाद लिखित पेपर होता है। उसके बाद interviw होता हे। यदि उसमे चयन हो जाये तभी सरकारी नौकरी लगती है। उसे सरकारी नौकरी करने की लगन लग गयी। उसने सरकारी नौकरी के फार्म भरने शुरू कर दिए।
घर की जिम्मेदारियों और नौकरी के साथ उसने टी,जी टी,के फार्म भरने शुरू कर दिए। उसने कई बार नौकरी के फार्म भरकर लिखित परीक्षा दी उसका चयन नही हुआ। उस पर निराशा हावी होने लगी। उसे लगा ये बड़ी नौकरी है। उस जैसी औरतो का उसमें चयन नही हो सकता। शहरी लड़कियाँ ही ठीक रहती है।
इस बारे में उसने मनोहर से कहा -में सरकारी नौकरी के योग्य नही हूँ। तभी तो इतने प्रयासों के बाद में मेरा चयन नही हो पा रहा है..
मनोहर बोला -मन छोटा मत करो। जब तुम इतनी पढ़ाई कर सकती हो। तुम ये नौकरी भी एक दिन जरूर करोगी।
सविता बोली -नौकरी करने की नही, मिलने की बात कर रही हूँ। ४ बार पेपर देने के बाद भी मेरा चयन नही हुआ। अब मुझे बिलकुल उम्मीद नही है। कि मेरी सरकारी नौकरी लगेगी।
मनोहर बोला -यदि सरकारी नौकरी इतनी आसानी से मिलती होती तो हर कोई सरकारी नौकरी कर रहा होता। तुम यदि पुरे मन से तैयारी करोगी तभी तुम्हे सफलता मिलेगी।
सविता भड़क उठी -आप कहना क्या चाहते हो। में आधे -अधूरे मन से पेपर देने जाती हूँ।
मनोहर बोला -तुम्हारी तैयारी में कही ना कही कमी है। तभी तो तुम्हे सफलता नही मिली। पढ़ाई करते हुए तुम्हे सिर्फ अपने से प्रतियोगिता करनी होती है। जितनी मेहनत करोगी उतने नंबर आ जायेंगे। उसका पाठ्यक्रम भी सिमित होता है। उस में से ही पेपर आता है लेकिन नौकरी के लिए एक नौकरी के लिए ३०० लोग भाग लेते है। उस नौकरी के लिए तुम्हे उन तीन सौ लोगो से ज्यादा नंबर लाने होंगे। तभी तुम्हे नौकरी मिलेगी। अब सोच लो दिल छोटा करने से काम नही चलेगा। अगर हिम्मत है तभी तुम्हे सफलता मिलेगी।
सविता बोली -मै नौकरी करना चाहती हूँ। मेरे मन में सरकारी नौकरी करने की बहुत इच्छा है।
मनोहर बोला - वैसे तुम्हे नौकरी की इतनी चिंता क्यों हो रही है। मै नौकरी कर तो रहा हूँ। तेरी कोन सी जरूरत पूरी नही करता। जो तू इतना ज्यादा नौकरी के बारे में सोचती है। में यहाँ के लोगो से ज्यादा कमाता हूँ। घर का घी, दूध ,और अनाज है। हम बहुतो से अच्छा खाते -पीते है। फालतू में अपना और मेरा ये कह कर खून मत जलाया कर मुझे और भी काम करने होते है। में दिन -रात तेरे बारे में नही सोच सकता समझी। आगे से ऐसी बाते मेरे सामने मत किया कर मुझे अच्छा नही लगता।
सविता उसका जबाब सुनकर चुप हो गयी।
सविता को नौकरी का सच समझ में आ गया। वह दिलोजान से नौकरी की तैयारियों में लग गयी। उसके बाद उसने दो बार और पेपर दिए पर उसका इसमें भी चयन नही हुआ। अब सविता को लगने लगा उसे नौकरी नही मिल सकती। ये नौकरियां भाग्यशाली लोगो को ही मिलती है
घर की जिम्मेदारियों और नौकरी के साथ उसने टी,जी टी,के फार्म भरने शुरू कर दिए। उसने कई बार नौकरी के फार्म भरकर लिखित परीक्षा दी उसका चयन नही हुआ। उस पर निराशा हावी होने लगी। उसे लगा ये बड़ी नौकरी है। उस जैसी औरतो का उसमें चयन नही हो सकता। शहरी लड़कियाँ ही ठीक रहती है।
इस बारे में उसने मनोहर से कहा -में सरकारी नौकरी के योग्य नही हूँ। तभी तो इतने प्रयासों के बाद में मेरा चयन नही हो पा रहा है..
मनोहर बोला -मन छोटा मत करो। जब तुम इतनी पढ़ाई कर सकती हो। तुम ये नौकरी भी एक दिन जरूर करोगी।
सविता बोली -नौकरी करने की नही, मिलने की बात कर रही हूँ। ४ बार पेपर देने के बाद भी मेरा चयन नही हुआ। अब मुझे बिलकुल उम्मीद नही है। कि मेरी सरकारी नौकरी लगेगी।
मनोहर बोला -यदि सरकारी नौकरी इतनी आसानी से मिलती होती तो हर कोई सरकारी नौकरी कर रहा होता। तुम यदि पुरे मन से तैयारी करोगी तभी तुम्हे सफलता मिलेगी।
सविता भड़क उठी -आप कहना क्या चाहते हो। में आधे -अधूरे मन से पेपर देने जाती हूँ।
मनोहर बोला -तुम्हारी तैयारी में कही ना कही कमी है। तभी तो तुम्हे सफलता नही मिली। पढ़ाई करते हुए तुम्हे सिर्फ अपने से प्रतियोगिता करनी होती है। जितनी मेहनत करोगी उतने नंबर आ जायेंगे। उसका पाठ्यक्रम भी सिमित होता है। उस में से ही पेपर आता है लेकिन नौकरी के लिए एक नौकरी के लिए ३०० लोग भाग लेते है। उस नौकरी के लिए तुम्हे उन तीन सौ लोगो से ज्यादा नंबर लाने होंगे। तभी तुम्हे नौकरी मिलेगी। अब सोच लो दिल छोटा करने से काम नही चलेगा। अगर हिम्मत है तभी तुम्हे सफलता मिलेगी।
सविता बोली -मै नौकरी करना चाहती हूँ। मेरे मन में सरकारी नौकरी करने की बहुत इच्छा है।
मनोहर बोला - वैसे तुम्हे नौकरी की इतनी चिंता क्यों हो रही है। मै नौकरी कर तो रहा हूँ। तेरी कोन सी जरूरत पूरी नही करता। जो तू इतना ज्यादा नौकरी के बारे में सोचती है। में यहाँ के लोगो से ज्यादा कमाता हूँ। घर का घी, दूध ,और अनाज है। हम बहुतो से अच्छा खाते -पीते है। फालतू में अपना और मेरा ये कह कर खून मत जलाया कर मुझे और भी काम करने होते है। में दिन -रात तेरे बारे में नही सोच सकता समझी। आगे से ऐसी बाते मेरे सामने मत किया कर मुझे अच्छा नही लगता।
सविता उसका जबाब सुनकर चुप हो गयी।
सविता को नौकरी का सच समझ में आ गया। वह दिलोजान से नौकरी की तैयारियों में लग गयी। उसके बाद उसने दो बार और पेपर दिए पर उसका इसमें भी चयन नही हुआ। अब सविता को लगने लगा उसे नौकरी नही मिल सकती। ये नौकरियां भाग्यशाली लोगो को ही मिलती है
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