#nokri

    सविता को गाँव  में रहते हुए कई साल हो गए थे। अब उसके बच्चे बड़े हो गए थे। उसकी इच्छा नौकरी करने की होने लगी। अब उसे लगने लगा जब उसने इतनी पढ़ाई की है। उसका सदुपयोग भी होना चाहिए।  इस बारे में उसने मनोहर से बात की। मनोहर बोला-जो तुम्हारे मन में आये  करो।  मेने तुम्हे पहले भी कभी नही रोका है। जो अब तुम्हे रोकूंगा।
   सविता उनके जबाब देने से समझ नही पायी .मनोहर गुस्से में बोले या नहीं। उसने दुबारा से यही प्रश्न किया तो मनोहर बोले -यदि तुम घर और बच्चो के साथ नौकरी की जिम्मेदारी निभा सको तो मुझे कोई एतराज नही है।
  ये सुनकर सविता की जान में जान आई।  उसके  गाँव में लड़कियों के विद्यालय में एक अद्यापिका की जरूरत थी।  सविता की सास के सामने पड़ोसिन ने कहा -तुम्हारी बहु बड़ी पढ़ी -लिखी है। उसे विद्यालय में रखवा दो। उसकी पढ़ाई काम आ जायगी।  यहाँ की लड़कियों का भी भला हो जायेगा।
   सविता की सास ने उसके सामने अद्यापिका की नौकरी के बारे में बात चलायी और उससे पूछा -क्या तुम इस विद्यालय में नौकरी करना चाहती हो।
    सविता को मुँह मांगी मुराद मिल गयी थी पर सास का मन जांचने के लिए उसने कहा-माजी आप जैसा कहोगी मै  वैसा ही करूंगी। पर बच्चो का क्या होगा। उनको इतनी देर तक कोन संभालेगा।
   सास ने कहा-उनकी चिंता मत कर मै उन्हें संभाल  लुंगी।
  सविता बोली -तीनो अब बहुत शैतान हो गए है। आपको परेशान कर देंगे।
 सास ने कहा -जितने वे तेरे बच्चे है। उतने ही वे मेरे भी बच्चे है। उनकी तू चिंता मत कर। मेरा भी समय उनके साथ अच्छा गुजर जायेगा।
  सविता ने असम्भव कार्य कर दिखाया था। इससे पहले  उनकी बिरादरी में किसी  भी औरत ने इतनी  पढ़ाई नही की थी। और ना ही अद्यापिका जैसी नौकरी करने के लिए घर से बाहर निकली थी। सविता की मेहनत रंग लायी। उसका सपना पूरा हो गया। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...