सरकार ने rh छुटियाँ 7 से घटा कर २ कर दी है। हर तरह के समुदायों की सरकारी छुटियो में हर साल इजाफा होता जा रहा हे। सरकारी छुटियाँ हर समुदाय के लोगो के लिए उपयोगी नही होती है। हर प्रान्त के लोग अपने त्यौहार अलग मानते है. जैसे- मुस्लिम त्योहारो की छुटियाँ हिन्दू समुदाय के लिए अनुपयोगी होती है। जैन धर्म की छुटियो का उपयोग हर धर्म के लोग नही कर पाते।
जबकि rh छुटियो का उपयोग हर समुदाय अपने त्योहारो के हिसाब से रख सकता है। हम अपने त्योहारो पर कार्यालय जाते है। लेकिन जिन त्योहारो को हम मनाते नही उन छुटियो का उपयोग हम समझ नही पाते किस तरह से करे।
लगभग 20 सरकारी छुटिया सरकार हर साल घोषित करती है। जिसका उपयोग हम घर में रह कर करते है। जिनकी हमें अधिक जरूरत नही होती। उन त्योहारो पर हम घर के काम निबटाने या घूमने में प्रयोग करते है। जबकि अपने समुदाय के त्योहारो पर किलसते रहते है। हमारे पास पूजा पाठ ढंग से करने का समय नही होता है।
सरकार को सरकारी छुटियाँ कम कर देनी चाहिए उसके स्थान पर rh की छुटियाँ बड़ा देनी चाहिए। सरकारी छुटियो के बारे में कुछ समय पहले सुनने में आया था। पंद्रह अगस्त ,26 जनवरी ,२ अक्टूबर केवल सरकारी छुटियो के तहत मनाई जाये।
20 छुटियाँ हर समुदाय अपने त्योहारो के हिसाब से मनाये तो सभी समुदाय के लोग खुश हो जायेंगे। छठ पूजा, ईद ,दीवाली जैसे त्यौहार लगभग तीन या तीन से अधिक दिन के होते है। सरकार इनपर एक दिन का सरकारी अवकाश घोषित करती है जिससे कोई भी समुदाय खुश नही होता।
हमें त्यौहार पर कार्यालय जाना पड़ता है। में विद्यालय में काम करती हूँ। छुट्टी बचाने के चककर में हम आधा -अधूरा त्यौहार मना कर विद्यालय पहुंच जाते है। सभी अद्यापक छुट्टी बचाने के लिए पहुँच तो जाते है लेकिन हमारा कर्तव्य बच्चो से जुड़ा हुआ है। अधिकतर बच्चे विद्यालय में आते ही नही है। जिन्हे पढ़ाने के लिए हमारी छुट्टियाँ कम की जाती है। हम उस दिन अपने कर्तव्य का पालन करने के स्थान पर खाली बैठ कर आ जाते है। जैसे अक्टूबर ,नबंबर के महीने में बच्चो की उपस्थिति बहुत कम रही। जिसके कारण अद्यापन कार्य नही हो सका।
वोट बैंक बढ़ाने की खातिर सरकार इन्हे घोषित तो कर देती है। लेकिन ये ख़ुशी उस समुदाय के लिए आधी -अधूरी होती है। हमारी तरह हर समुदाय के लोग दूसरे धर्म की छुटियो पर ख़ुशी नही मनाते। लेकिन अपने धर्म की छुटियो पर सरकार को बुरा जरूर कहते है।
आज भी संयुक्त परिवार में रहने वाले लोगो को सुनना पड़ता है- काम से बचने के लिए नौकरी का बहाना बना रही है.
हमारे व्यवसाय में अधिकतर अद्यापिकाए सुबह 4 बजे उठ कर काम करके जाती है। ये हमारा रोज का काम होता है। जबकि त्योहारो पर काम बढ़ जाता है। ऐसे में आप खुद सोचिये यदि सुबह के समय सही तरह से त्यौहार मना कर जाये तो हमें कितने बजे जगना पड़ेगा। हमारे लिए त्यौहार मजा कम सजा अधिक बन रहे है। आप ही बताओ सरकार की दयानतदारी किसे खुश कर रही है।
जबकि rh छुटियो का उपयोग हर समुदाय अपने त्योहारो के हिसाब से रख सकता है। हम अपने त्योहारो पर कार्यालय जाते है। लेकिन जिन त्योहारो को हम मनाते नही उन छुटियो का उपयोग हम समझ नही पाते किस तरह से करे।
लगभग 20 सरकारी छुटिया सरकार हर साल घोषित करती है। जिसका उपयोग हम घर में रह कर करते है। जिनकी हमें अधिक जरूरत नही होती। उन त्योहारो पर हम घर के काम निबटाने या घूमने में प्रयोग करते है। जबकि अपने समुदाय के त्योहारो पर किलसते रहते है। हमारे पास पूजा पाठ ढंग से करने का समय नही होता है।
सरकार को सरकारी छुटियाँ कम कर देनी चाहिए उसके स्थान पर rh की छुटियाँ बड़ा देनी चाहिए। सरकारी छुटियो के बारे में कुछ समय पहले सुनने में आया था। पंद्रह अगस्त ,26 जनवरी ,२ अक्टूबर केवल सरकारी छुटियो के तहत मनाई जाये।
20 छुटियाँ हर समुदाय अपने त्योहारो के हिसाब से मनाये तो सभी समुदाय के लोग खुश हो जायेंगे। छठ पूजा, ईद ,दीवाली जैसे त्यौहार लगभग तीन या तीन से अधिक दिन के होते है। सरकार इनपर एक दिन का सरकारी अवकाश घोषित करती है जिससे कोई भी समुदाय खुश नही होता।
हमें त्यौहार पर कार्यालय जाना पड़ता है। में विद्यालय में काम करती हूँ। छुट्टी बचाने के चककर में हम आधा -अधूरा त्यौहार मना कर विद्यालय पहुंच जाते है। सभी अद्यापक छुट्टी बचाने के लिए पहुँच तो जाते है लेकिन हमारा कर्तव्य बच्चो से जुड़ा हुआ है। अधिकतर बच्चे विद्यालय में आते ही नही है। जिन्हे पढ़ाने के लिए हमारी छुट्टियाँ कम की जाती है। हम उस दिन अपने कर्तव्य का पालन करने के स्थान पर खाली बैठ कर आ जाते है। जैसे अक्टूबर ,नबंबर के महीने में बच्चो की उपस्थिति बहुत कम रही। जिसके कारण अद्यापन कार्य नही हो सका।
वोट बैंक बढ़ाने की खातिर सरकार इन्हे घोषित तो कर देती है। लेकिन ये ख़ुशी उस समुदाय के लिए आधी -अधूरी होती है। हमारी तरह हर समुदाय के लोग दूसरे धर्म की छुटियो पर ख़ुशी नही मनाते। लेकिन अपने धर्म की छुटियो पर सरकार को बुरा जरूर कहते है।
आज भी संयुक्त परिवार में रहने वाले लोगो को सुनना पड़ता है- काम से बचने के लिए नौकरी का बहाना बना रही है.
हमारे व्यवसाय में अधिकतर अद्यापिकाए सुबह 4 बजे उठ कर काम करके जाती है। ये हमारा रोज का काम होता है। जबकि त्योहारो पर काम बढ़ जाता है। ऐसे में आप खुद सोचिये यदि सुबह के समय सही तरह से त्यौहार मना कर जाये तो हमें कितने बजे जगना पड़ेगा। हमारे लिए त्यौहार मजा कम सजा अधिक बन रहे है। आप ही बताओ सरकार की दयानतदारी किसे खुश कर रही है।