# temple of king vikrmaditya

                         विक्रमादित्य का मंदिर 

         


   मैने   उज्जैन में घूमते समय विक्रमादित्य का मंदिर देखा तो हैरान हो गई। तब मुझे उनके उज्जैन  के राजा होने का ध्यान नहीं था।जबकि वेताल पच्चीसी और सिंहासन बत्तीसी  पढ़   चुकी थी। उनमे अनेक बार राजा शब्द का प्रयोग अवश्य  हुआ है। लेकिन उन्हें विक्रमादित्य कहकर बहुत कम सम्बोधित किया गया है। 

       पहली बार बहुत बड़े आकार  की मूर्ति  मुझे  हैरान कर रही थी।  वह मूर्ति  बहुत बड़े कमरे में रखी  हुई थी। सड़क से चलते हुए ही उस बड़ी मूर्ति के दर्शन हो रहे थे। उसके आकार  को देखकर लग रहा था। उसे अंदर ले जाकर कैसे स्थापित किया गया होगा। 

           उज्जैन में उन्हें केवल राजा नहीं बल्कि देवता माना  जाता है।   सबसे पहले लगा उनके अंदर श्रद्धा है भी या नहीं बल्कि लोगो से पैसे लेने के बहाने उन्होंने ऐसी मूर्ति की स्थापना की है। 

        बाद में गहराई में जाने पर पता चला। यह वहां के जनमानस में रहने वाले है। उनके बाद के राजाओ का किसी को नाम याद  नहीं है। राजा का महल समय ने ढहा दिया है। उसके अवशेष भी कहीं नहीं मिलते।  उसके बाबजूद केवल एक राजा सबको आज तक याद  है। किसी से पूछा जाये तो वहां के वर्तमान राजा का नाम भी कितने लोगो को याद  होगा सोच कर देखिये। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...