विश्व की नाभिस्थली उज्जैन
भारतीय समय के अनुसार एक दिन और रात सूर्योदय से लेकर अगले दिन तक में पूरा होता है जबकि अंग्रेजी समय अनुसार रात के 12 बजे जबरन दिन बदल दिया जाता है जबकि उस वक़्त उस दिन की रात ही चल रही होती है। समय की यह धारणा अवैज्ञानिक है।
टाइम जॉन को सामान समय क्षेत्र कहते है। दुनिया की घडियो के समय का केंद्र इस समय में ब्रिटेन का ग्रीनविच शहर है। यही से दुनिया की घडियो का समय तय होता है। इंडियन स्टेंडर्ड टाइम भी यही से तय होता है। आज के जमाने में घड़ियाँ स्थानीय स्टेंडर्ड टाइम के अनुसार चलती है। उसी हिसाब से सारे काम होते है। क्या यह जरूरी है कि हर देश में एक ही टाइम जॉन हो ?
19 शताब्दी से पहले भारत में विक्रमादित्य के समय से चले आ रहे समय को सूर्य के मुताबिक तय किया जाता था लेकिन अंग्रेजो ने भारत में सब कुछ बदल दिया। विक्रमादित्य के समय में पूरे भारत का समय उज्जैन से तय होता था। .रोमन कैलेंडर भी भारत के विक्रमादित्य कैलेंडर से ही प्रेरित थे ।
उज्जैन स्थित ज्योतिर्लिंग को महाकाल भी इसीलिए कहा जाता था ,क्योंकि वही से दुनियाभर का समय तय होता था। खगोलशास्त्रियो के अनुसार उज्जैन की भौगोलिक स्थिति विशेष है। यह नगरी पृथ्वी और आकाश की सापेक्षता में ठीक मध्य में स्थित है इसलिए इसे पूर्व के ग्रीनविच के रूप में भी जाना जाता है। इसलिए स्वय जयसिंह ने उज्जैन में कालगणना के लिए जंतर -मंतर का निर्माण करवाया।
वराहपुराण में उज्जैन को शरीर का नाभि देश और महाकालेश्वर को अधिष्ठाता कहा गया है महाकाल की यह नगरी विश्व की नाभिस्थली है।
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