उज्जैन का कालभैरव मंदिर
महाकालमंदिर के दर्शन तब तक पूर्ण नहीं माने जाते जब तक आप कालभैरव मंदिर के दर्शन नहीं करते। इसलिए महाकालेश्वर मंदिर के बाहर से कालभैरव मंदिर तक जाने के लिए गाड़ियां मिल जाती है। आप चाहे तो आने -जाने का किराया तय कर सकते है। वरना एक तरफ के हिसाब से भी जा सकते है। जैसी आपको सुविधा लगे।
कहा जाता है। कालभैरव मंदिर प्राचीन मंदिरो में से एक है। यहाँ प्राचीन समय में शराब और और बलि दोनों भेंट की जाती थी। लेकिन कुछ समय से बलि देने की मनाही कर दी गई है। अब केवल शराब का भोग लगाया जा सकता है। पूजा का समान मंदिर के बाहर मिल जाता है।
जिनकी मनोकामना पूरी हो जाती है। वे प्रसाद में अवश्य शराब चढ़ाते है। यहां पर बहुत अधिक मात्रा में शराब मूर्ति को चढाई जाती है सबको समझ नहीं आता ये जाती कहाँ है। बाहर निकलने के लिए किसी नाली आदि की सुविधा भी नहीं है। अंग्रेजो ने इस मूर्ति के आस -पास खुदाई करवा कर देखने की कोशिश की। लेकिन किसी को समझ नहीं आया।
इस मंदिर के पास एक गुफा है। जिसके अंदर एक बार में केवल एक इंसान ही जा सकता है।
इस मंदिर के बाहर दीपस्तम्भ भी बना हुआ है। जिसकी शाम के समय विशेष रूप से तैयार करके जलाया जाता है। इस मंदिर में मनोकामना पूर्ति के लिए आज भी अनेक लोग आते है।
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