कुमुद्वती उज्जैन का अन्य नाम
लोमश ऋषि एक बार तीर्थ यात्रा करते हुए उज्जैन पहुंचे तब उन्होंने यहां के तालाब, नदी और पोखरों को कुमुदिनी तथा कमलो से भरे हुए देखा .उन जगहों को देखकर उन्हें लगा मानो धरती अनेक चंद्रो से सजी हुई है। कमल के पत्ते अर्ध चंद्र के सामान लग रहे थे। शिव के माथे पर स्थित चंद्र की शोभा तथा उनसे निकले प्रकाश से यह कुमुदिनी वन सदा खिला रहता था। इसलिए लोमश ऋषि ने इसका नाम कुमुदवती रख दिया। इस नामकरण का कारण यहाँ की आकर्षक प्राकृतिक शोभा रही है।
यहां की जनसंख्या ज्यादा नहीं है। खुले हुए प्राकृतिक स्थान आज भी मन को लुभाने में समर्थ है।
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