# जिस देवी को अपने राज्य में आने से मना किया

          जिस देवी को अपने राज्य में आने से मना  किया 

       



       जब मैंने भूखी माता के बारे में सुना तब में हैरान हो गई। ऐसी भी कोई माता होती है। मुझे इनका महत्व समझ नहीं आया। इनका मंदिर  शिप्रा नदी के पार  बना हुआ है। कहा  जाता है। एक समय में भूखी  माता हर घर से एक इंसान खाने के लिए मांगती थी। दुखी मन से सब उनकी इच्छा पूरी करते थे। 

         एक समय  विक्रमादित्य एक कुम्हारिन के घर के पास से  गुजर रहे थे। उन्हें उस घर से रोने की आवाज आ रही  थी। वह उस घर के अंदर गए।  उसका कारण पूछने पर उन्हें बहुत दुःख हुआ। उस घर के इकलौते बेटे की आज बलि दी जाएगी।    

         राजा ने उनका दुःख दूर करते हुए कहा-' आज आपका बेटा   नहीं उसकी जगह मै जाऊंगा। '

         राजा ने भूखी माता के मंदिर से लेकर राजमहल तक अनेक पकवान बनवा कर रखवा दिए। उसके बाद उन्हे  राजा की तरह तैयार किया गया। वह सही जगह पर जाकर लेट गए। उनके ऊपर चादर डाल  दी गई। उसके ऊपर तख्त बिछा कर अनेक पकवान रख दिए गए। 

         माता उनकी आवभगत से खुश हो गई। उन्होंने पूछा ये सब जिसने किया है  वह सामने आये। तब राजा बाहर निकले तब माता ने वरदान मांगने के लिए कहा। तब राजा ने कहा - 'आप कभी उज्जैन मत आना।' 

        आपको हैरानी हुई। मुझे भी हुई थी। एक माता को गुजरात से बुला कर लाये। दूसरी माता को राज्य में आने से मना कर रहे थे। 

        ये माता मृत्यु देने वाली थी दूसरी वर देने वाली थी। मृत्यु को कौन बुलाना चाहेगा। 

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