#confluence of longitude and tropic of cancer at ujjain

             देशांतर और कर्क रेखा का संगम उज्जैन में 


         भारत में विक्रमादित्य के शासन काल में सम्पूर्ण भारत का समय उज्जैन से तय होता था।  ग्रीक ,फ़ारसी ,अरबी और रोमन लोगो ने भारतीय कालगणना  से प्रेरणा लेकर ही अपने  अपने यहाँ के समय को जानने के लिए अपने तरीके  की वेधशालाएं  बनाई थी।  कैलेंडर निर्धारित किये थे। 

       प्राचीन भारत की ग्रीनविच   यह नगरी देश के मानचित्र में 23. 9  अंश उत्तर  अक्षांश एवं 74. 75 अंश पूर्व रेखांश पर समुद्र सतह से लगभग १६५८ फीट  ऊंचाई पर बसी है। वर्तमान में ग्रीनविच मान से उज्जैन 23. 11  अंश पर स्थित है। भौगोलिक गणना के अनुसार प्राचीन आचार्यो ने उज्जैन को शून्य रेखांश पर माना  जाता है कर्क रेखा भी यही से गुजरती है। देशांतर रेखा और कर्क रेखा यही एक -दूसरे को काटती  है। 

 प्राचीन भारतीय मान्यता के अनुसार जब उत्तरी ध्रुव की स्थति पर 21  मार्च से प्राय 6  मास का दिन होने लगता है प्रथम 3  माह पूरे होते ही सूर्य दक्षिण क्षितिज  से बहुत दूर हो जाता है। यह वह  समय होता  है जब सूर्य उज्जैन के ठीक ऊपर होता है। उज्जैन का अक्षांश व् सूर्य की परम् क्रांति दोनों ही २४ अक्षांश पर मानी  गई है सूर्य के ठीक सामने होने की यह स्थिति संसार के किसी और नगर की नहीं है। 

        स्कंदपुराण के अनुसार  महाकालेशवर  को कालगणना का प्रव्रतक   भी माना  गया है  प्राचीन भारत की समय गणना का केंद्रबिंदु होने के कारण ही काल के देवता महाकाल है 

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