#harsidhhi mata

             

हरसिद्धि माता 





 हरसिद्धि माता ने कहा  - 'ठीक है। मै  तुम्हारे साथ चलने के लिए तैयार हूँ। यदि तुमने मुझे मुड़कर देखा तब मै  उसी जगह रुक जाउंगी।।

         राजा माता के पायल की आवाज सुनता हुआ। आगे -आगे चलने लगा। बहुत समय बाद आवाज आनी  बंद हो गई तब राजा ने मुड़कर देखा। माता कहाँ  है।  उनकी आवाज क्यों नहीं आ रही लेकिन वह पीछे थी।

        तब  माता ने कहा - 'तुमने मुड़कर देखा अब मै  यही रुक जाउंगी। तुझे यदि मंदिर बनाना है तो यही बना लो अब मै  आगे नहीं जाउंगी। ' 

  उज्जैन अब पास ही था। तब राजा ने उसी जगह मंदिर बना दिया। यह मंदिर महाकालेश्वर मंदिर के बाद भव्य मंदिर है। वह महाकालेश्वर मंदिर से ज्यादा दूर नहीं है।  उसे देखकर मन खुश हो जाता है। 

         इससे पहले मेने कभी विक्रमादित्य का मंदिर नहीं देखा था। पहली बार सिंहासन पर विराजमान विक्रमादित्य का मंदिर देखा मुझे बहुत अच्छा लगा। कहा जाता है- विक्रमादित्य का महल भी पास में बना हुआ था। लेकिन अब उसके नामो -निशान नहीं है। लेकिन मुझे विश्वास है। कभी ये सच में रहा होगा। 


     

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