प्रेम की डोर
जिन्हे हम प्यार करते है उन्हें कभी अपने प्यार का अहसास सही तरह से नहीं करवा पाते। हमारा पूरा जीवन उनके लिए समर्पित है। हमारा त्याग और बलिदान उनके लिए नगण्य होता है। वह सारा जीवन हमारे किये कामो में कमियां ही निकालते रहते है और हम हमेशा कसमसाते रह जाते है। हमसे ऐसी क्या गलती हो गई जिस कारण हमारे सारे कार्यो को व्यर्थ समझा जा रहा है।
हमें जीवन में हमेशा अधूरेपन का अहसास होता रहता है। ये सभी के जीवन की विडंबना है। उनके किये निस्वार्थ कार्यो को समझने की कोई कोशिश नहीं करता। वे दूर रहने वालो के किये एक काम के भी गुणगान कर रहे होते है जबकि जो साथ में रहते हुए, पूरी जिंदगी उनपर कुर्बान कर देते है उनके कार्यो को समझने की कोशिश नहीं करते है।
लोग परिवार चाहते है लेकिन परिवार के कार्यो को महत्व नहीं देते है। उन्हें उनके हर काम में कमियां दिखाई दे रही होती है। उनका परिवार के प्रति कड़वाहट से मन भरा होता है।
बुरा व्यवहार करने वाले लोग कुछ होते है। जबकि परिवार के अच्छे कार्यो को भी महत्त्व देने से सभी डरते है। जब परिवार से दूर हो जाते है तब उन्हें परिवार का महत्त्व समझ आता है। यदि परिवार में रहते हुए ही उसका महत्त्व समझ जाये तो सभी का जीवन ख़ुशी से भर जाये।
आजकल सिंगल परिवार होते है बच्चे और बड़े दोनों परस्पर बेजार होते है। वे एक दूसरे को कड़वे शब्द सुनाने से नहीं चुकते। जब बड़े हो जाते है तब उन्हें बड़ो के हर काम में कमियां दिखाई देती है।
बचपन का विरोध सहनीय हो जाता है क्योंकि हम सोचते है उन्हें दुनियां की समझ नहीं है वे हमसे अलग होकर कहाँ जायेंगे।
बड़े होने पर उन्हें दुनियां की इतनी अधिक समझ आ चुकी होती है कि उन्हें बड़े दुनियां के सामने कमतर नजर आने लग जाते है।
हम जिनके साथ रहते है उनके साथ प्यार के बंधन में बंधे होते है। इस बंधन की डोर पतली होती है लेकिन जिस प्यार के धागे से बंधी होती है उसे हम नजरअंदाज कर जाते है।
उस डोर को तोड़ देते है डोर टूटते ही दुनियां की सच्चाई सामने आती है। लेकिन जब तक डोर से जुड़े होते है तब तक उसका महत्व नहीं समझ पाते है। इसकी समझ बरसो बाद आती है तब बहुत देर हो चुकी होती है। काश हम समय रहते ही उस डोर का महत्त्व समझ लेते।
