sad end of helplessness

                  बेबसी का दुःखद  अंत 

        दुखों की एक सीमा  होती है। उससे ज्यादा दुःख मिलने पर शरीर और मन दोनों बगावत करने लगते है। मेने एक बार आपको अपनी सखी मेनका की बेबसी के बारे में बताया था। मेनका ने अच्छी बहु बनने की सारी  कोशिशे की अच्छी बहु के साथ ही उसने सरकारी नौकरी पाकर तन ,मन और धन से सबको खुश करने की कोशिश की लेकिन उसकी सारी कोशिशे नाकाम हो गयी। धीरे -धीरे वह  अंदर से टूटने लगी। उसकी टूटन को किसी ने समझने की कोशिश नहीं की। उसे सुबह से लेकर शाम तक  हर समय काम करने के बाबजूद  कोई भी इंसान  गलतियों पर डांटने से नहीं चुकता था।

        वह चार  बहनो और एक भाई  के बीच  में पली  थी। उसने सुख और दुःख दोनों देखे थे। उसके  अंदर ससुराल में  सबको खुश करने के संस्कार भरे गए थे।चुप रह कर वक्त बदलने का इंतजार करने के लिए कहा गया था।गलत सुनकर भी  किसी को पलट कर जबाब नहीं देना।  लेकिन सबको खुश करते हुए कब उसकी सारी  खुशियां   खो गयी। उसे पता नहीं चला।

        उसके पति चंडीगढ़ में नौकरी करते थे। वह सप्तांहत पर घर आते थे। लेकिन उसे पति के आने पर भी ख़ुशी का अहसास नहीं होता था। क्योंकि वह उससे मिलने पर कोई ख़ुशी जाहिर नहीं करते थे बल्कि जितने समय साथ रहते थे, उसमे केवल कमियां निकालते  रहते थे   और अपने भाग्य को कोसते रहते थे। 

   आदमी कितनी भी ऊँचे  पद पर हो। उसके पद और पैसे से ज्यादा उसका व्यवहार मायने रखता है। लेकिन यह बात महेश नहीं समझ सके। उन्हें हमेशा  लगता है। यह मेनका मेरे हिसाब से नहीं बनी.इसे सुधारने  की जरूरत है। ससुराल का प्रत्येक सदस्य उसे सुधारने  में अहम भूमिका निभाता था। 

        इतना दुःख सहने की ताकत उसमे नहीं थी। एक दिन उसके अंदर जीने की इच्छा ही खत्म हो गयी। जब उसके पति ने उसपर हाथ उठा दिया। . उसने बहस करने की कोशिश भी नहीं की। सबको नाश्ता कराने के बाद अपने कमरे में जाकर फांसी लगा ली। उसे उसके बच्चे का मोह भी नहीं रोक सका। उसे रोता बिलखता छोड़ कर दुनियां से चली गयी। 

       उसके पति ने जब कमरे में आकर उसे फांसी पर लटका पाया तब उसके होश उड़ गए। उसने शोर मचाया सब इकठ्ठे हुए उसे नीचे  उतारा गया   लेकिन अब कुछ नहीं किया जा सकता था। वह इस दुनियां को छोड़ कर जा चुकी थी।  उन्हें इतने बड़े अंजाम का अहसास नहीं था।

          उनके हाथो के तोते उड़ चुके थे। पुलिस केस बन चुका  था। किसी तरह उसका अंतिम संस्कार करने के बाद परिवार के सब सदस्य दरवाजे पर ताला  लगाकर भाग  गए। जिन्हे हर समय लगता था उन्होंने इस घर में मेनका को रख कर उस पर अहसान किया है। आज उनका वही आलिशान घर उसके बिना वीराना हो गया है । उसका बच्चा  लावारिसों की तरह पल रहा है। जिसे मेनका बहुत प्यार करती थी। इसके लिए आप किसे जिम्मेदार कहेंगे। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...