#GROWING OBESITY CONCERNED FAMILY

          बढ़ता मोटापा ,फिक्रमंद परिवार 

   माधव का मोटापा दिनोदिन बढ़ता जा रहा था।  उसका मोटापा अब सबका ध्यान खींचने लगा था। उसका पेट लटका हुआ दिखने लगा था। उसे चलने में दिक्क्त आने लगी थी। वह लेटने के बाद गहरी नींद सो नहीं पाता  था। उसे साँस संबंधी परेशानियां शुरू हो गई थी। अब उसे सीढ़ियां चढ़ने , चलने, उठने बैठने में भी दिक्क़ते आने लगी थी। उसे समाज से  जुड़ने में भी परेशानी होने लगी थी। उसमे नकारात्मक भावनाए  भी पनपने लगी थी। लेकिन उसने अपने फैलते शरीर को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं की। 

          उसके घर में पैसों  की कमी नहीं थी। उसके पापा उसे जरूरत से ज्यादा पैसे देते थे। वह  बचपन में घर से नाश्ता करने के बाबजूद , विद्यालय में पहुंचने से पहले खोमचे वालो से लेकर कुछ औऱ खा  लिया करता था। लंच में घर का खाना होने के बाबजूद केंटीन से भी कुछ लेकर खा लेता था। विद्यालय से छुट्टी के बाद ,वह बाहर निकल कर  कुछ मनपसंद  खा  कर  ही घर जाता था।  घर पहुंचने पर घर का बना खाना भी चुपचाप खा लेता था। उसे भरे पेट खाना खाने में कोई दिक्क्त महसूस नहीं होती थी।  इस कारण जितना काम करता था। उससे कई गुना ज्यादा खाता  था ,हमारे समाज में गोल -मटोल बच्चे अच्छे लगते है। लेकिन एक सीमा  के बाद जब  शरीर बैडोल होने लगता है उसे संभालना बहुत मुश्किल हो जाता है। 

         जब माधव  छोटा था यानी नौ साल का होने पर उसके अभिवावको ने  उसके मोटापे  की तरफ ध्यान देना शुरू किया। उसके घर में सभी  अमीरी का मतलब आराम दायक जिंदगी  को  समझते थे। तब वह भी आरामदायक जिंदगी जीना ही पसंद करता था।

        उसके अभिवावको ने उसे खेलो की तरफ प्रोत्साहित करने की कोशिश की। उसे जबरदस्ती खेलने भेजने लगे। तब वह खेलने जाता जरूर था। लेकिन क्रिकेट खेलते वक्त, बेटिंग करना पसंद करता था। दौड़ने के काम  या बॉलिंग करने के लिए,दूसरो   को किसी न  किसी तरह मना  लेता था।

        खेलने के बाद भी जब उसका  वजन कम नहीं हुआ तब उन्होने  उसके खेलने के तरीके  का पता लगाया।वह उसके कारनामे पर हैरान हो गए। तब  अभिभावको ने उसे बाहर जबरदस्ती खेलने  भेजना बंद कर दिया। 

       छोटे बच्चो को शारीरिक काम के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। लेकिन बड़ा होने पर पर उनसे काम करवाना कठिन हो जाता है। आजकल यह समस्या बढ़ती जा रही है। आजकल बच्चे जिम आदि में जाकर खाने पर नियंत्रण करके,  कुछ समय के लिए वजन जरूर कम कर लेते है। व्यायाम और खाने पर नियंत्रण हटते ही फिर से मोटे  हो जाते है। 

       माधव ने किसी तरह से भी वजन कम  करने के बारे में सोचा ही नहीं। अभिवावको  के सारे  प्रयास बेकार गए। उसे उनकी रोकटोकी पसंद नहीं आती थी। उसके फैलते शरीर के कारण  सभी फिक्रमंद थे। लेकिन जिसे फ़िक्र करनी चाहिए थी। वह लापरवाह था। 

             

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