#HABIT OF STUDENTS AND SCHOOL

           विद्यार्थियों की आदते और विद्यालय 

     


   आज से सरकार  ने विद्यालय खोल दिए है। सरकार ने बच्चो को सुरक्षित रखने के उपाय सुझाये है। उनका पालन बच्चे केवल अध्यापिका  की उपस्थिति में करते है। बाकि समय एकजुट बैठना पसंद करते है। उनका नकाब भी डांटने पर लगता है या आधा -अधूरा लगा कर सोचते है दूसरो  पर अहसान कर रहे है। बहुत जल्दी नकाब नीचे हो जाता है। उनके पास नकाब नीचे  रखने के अनेक बहाने तैयार रहते है।  उनके लिए जिंदगी से खिलवाड़ करना आसान है। 

       कोई छीकता है या खांसता है तब भी वह और अन्य बच्चे सावधानी नहीं बरतते। उसके भी अनेक बहाने  तैयार होते है। वैसे बच्चे बहुत समय से घर में रहकर परेशान हो गए है। वे आजादी की तलाश में विद्यालय जाना जरूर चाहते है। उन्हें चारदीवारी में बंद रह्ना  बिलकुल पसंद नहीं है। 

       एक दूसरे की चीजों को छूने से परहेज नहीं करते। वे जिस तरह परिवार में रहते है कक्षा में भी वैसे ही रहते है। बड़ी कक्षाओं में हर कालांश  के बाद  अध्यापिका बदलती है। उस समय बच्चे पूरा आजादी का फायदा उठा लेना चाहते है। 

      ये खाना मिल बाँट कर अब भी खाना चाहते है। उन्हें बहुत समझाने  पर भी ये बात समझ में नहीं आती। करोना  दबे पांव किसी पर भी हमला कर सकता है। इस बीमारी के लक्षण कई दिन बाद दिखाई देते है।  तब तक दूसरे के अंदर विषाणु  पहुंच चुके होते है। 

     सरकारी सुविधाओं का जिस तरह से बंदरबांट होता है। उससे सभी तक सुरक्षा के उपाय पहुंचने में मुझे संदेह है।  बच्चो को सुरक्षित रखना उनके अभिभावकों का काम है। यदि उन्हें सुरक्षित और जीवित देखना चाहते है तो उन्हें अभी विद्यालय न भेजना ठीक है। बाकि आपकी मर्जी। 

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