#INDIRECT EFFECT OF OBESITY

           मोटापे के परोक्ष प्रभाव 

   माधव अपने मोटापे से खुद भी बहुत परेशान था। लेकिन मोटापे को कम करने के लिए  जितनी दृढ़ इच्छाशक्ति चाहिए वह उसमे नहीं थी। वह रोज निश्चय करता कल से व्यायाम करूंगा और खाने पर भी नियंत्रण करूंगा लेकिन वह उसे निभा नहीं पाता  था। उसके जीवन में कल कभी नहीं आ सका। जब उसने एक किलो भी वजन कम करने के लिए प्रयास किये हो।  

            उसके अभिभावकों ने अनेक विशेषज्ञों से परामर्श किया जो उसका एक दिन में एक किलो तक वजन कम करवा  सकते थे। लेकिन उसे अपने शरीर को तकलीफ देना बिलकुल पसंद नहीं था।वो तरीके  वह दूसरो  को बता कर खुश होता था। लेकिन अपने ऊपर आजमाने की कभी कोशिश नहीं की। 70  किलो से कब उसका वजन डेढ़ सौ  किलो पर पहुंच गया। वह इसका अंदाजा नहीं लगा पाया। 

        उसके लिए केवल व्यायाम और खाने के द्वारा वजन कम करने के प्रयास किये गए। यदि अदनान सामी या आकाश अम्बानी की तरह  माधव  ने सर्जरी की सहायता ली होती तो  शायद उसका मनोबल बढ़ जाता।  वह वजन कम करने के लिए उत्साहित हो जाता। 

     मेने उसके सामान एक मोटे  इंसान को  जाने की सलाह दी तब उसने कहा - ""मैं सर्जरी करवा लुंगा  लेकिन  मुझसे व्यायाम नहीं होता।  मैं  खाना भी कम  नहीं खा सकता हूँ। "" मैं  मध्यवर्गीय इंसान  के मुँह से  सर्जरी की बात सुनकर हैरान हो गयी। क्योंकि मुझे लगता है बिना मतलब सर्जरी करवाने से  दूसरी परेशानियां पैदा हो जाती है। अधिकतर लोग सर्जरी से इसलिए डरते रहते है ,

         माधव को करोना  हो गया। उसके साथ ही उसके बूढ़े  माँ -बाप को भी करोना  हो गया. हम उसके अभिभावकों की बढ़ती उम्र और करोना  से डरे हुए थे।क्योंकि वे पक्षाघात और दिल के मरीज थे उन्हें रक्तचाप और मधुमेह की बीमारी थी। अधिकतर  अस्पताल वाले उनके अभिभावकों को अस्पताल में प्रवेश देने के लिए तैयार  नहीं थे क्योन्कि उनकी उम्र ज्यादा थी जबकि माधव को हर अस्पताल  प्रवेश  देने के लिए तैयार था।  उसने प्रण  ले लिया था जिस अस्पताल में माँ =पापा का इलाज  हो सकेगा उसी में अपना इलाज करवाऊंगा। बड़ी मुश्किल से एक अस्पताल उसके अभिभावकों को लेने के लिए तैयार हुआ  तब सब अस्पताल में इलाज करवा पाए। उसका सोचना सही था। हम सब इकट्ठे होंगे तब सबकी अच्छी तरह से देखभाल कर सकेंगे।  हमें माधव को लेकर कोई चिंता नहीं थी। हमें लग रहा था। उसकी जवान उम्र इस बीमारी को झेल जाएगी। उसे कुछ नहीं होगा।

       लेकिन माधव करोना  का सामना नहीं कर सका और दुनियां छोड़ कर चला गया। उसके  बिना उसका पूरा परिवार उजड़ गया। उसके अभिभावक  करोना बच गए। लेकिन बेटे के बिना  वह हर रोज भगवान  से मौत मांगते है।  जिस व्यवसाय को उसने उन्नति के शिखर पर पहुंचा दिया था। वह उसके जाते ही खत्म हो गया। 

          उसकी पत्नी बिना पति  के ससुराल में रहने के लिए तैयार नहीं थी। वह मायके चली गयी।  उनके बच्चे दादा -दादी,बाप और बुआ का प्यार  सभी से महरूम हो गए हें।

        एक इंसान की मौत उसकी लापरवाही किस तरह परिवार  की तबाही का कारण बन जाती है। यह माधव की मौत ने मुझे दिखा दिया। उनके सभी हमदर्द उसकी मौत के सबा साल बाद भी गम से उबर नहीं सके है। यदि वह किसी भी तरिके से अपना वजन कम कर लेता तो उसके परिवार को ये दिन नहीं देखना पड़ता। 

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