प्यार की महत्ता
भारतीय परिवेश में दम्पत्ति का प्यार जताना बेशर्मी कहलाता है। जिसके कारण बाहर समाज में आते समय वे दर्शाते है जैसे वे परस्पर अजनबी है। जिसके कारण उनके बच्चे भी अभिभावकों के सम्बन्ध के बारे में नहीं जान पाते। ऐसा ही एक संयुक्त परिवार का उदाहरण देने जा रही हूँ।
उस परिवार में जब दो भाई -बहनो ने घर में हो रही शादियों के बारे में आपस में बात करते हुए पूछा-" यहाँ सबकी शादी होती है। हमारे मम्मी पापा की शादी क्यों नहीं होती है।" क्योंकि हमारे समाज में बच्चो को समझाया ही नहीं जाता। तब उनकी बात सुनकर हंसी भी आयी क्योंकि संयुक्त परिवार में रहते हुए उनका अधिकतर समय अपने दादी -बाबा के साथ बीतता था।
मेने कभी अपने मम्मी -पापा या सास -ससुर को परस्पर हाथ पकड़े नहीं देखा था। इस कारण में भी कभी कमरे से बाहर पति का हाथ नहीं पकड़ सकी।
एक बार कश्मीर में फोटो खिचवाते समय फोटोग्राफर ने जब मुझे इनका हाथ पकड़ने के लिये कहा तब मुझे बहुत अजीब लगा। उसके बहुत जोर देने पर जब हाथ पकड़ा तो एक अलग सा अहसास हुआ। जो इतनी पाबंदियों में रहते हुए कभी नहीं हुआ था।
भारत में रहते हुए हम इतना अधिक नियंत्रण रखते है। कि कोमल भावनाओ का अहसास करना भूल जाते है। धीरे -धीरे जीवन में रूखापन उभरता चला जाता है।
जब में पोर्टब्लेयर मे समुद्र के किनारे घूम रही थी तब हाथ पकड़ने पर आत्मविश्वास बड़ा क्योंकि जब लहरे आकर वापिस लौटती है तब वापिस जाते हुए पैर के नीचे की रेत भी ले जाती है। जिसके कारण गिरने और बह जाने का डर लगता है।
पोर्टब्लेयर में बहुत सारे नवविवाहित जोड़े घूम रहे थे उन्हें देखकर हमारे अंदर जो प्यार सूख चुका था वह अहसास जग उठा।जीवन में प्यार का अलग महत्व है उसे नकारते रहने से किसे सुख मिलता है। सोच कर देखो ?
मै सिर्फ इतना कहना चाहती हूँ। जो प्यार हमारे अंदर होता है। उसे बाहर दिखाने में बुराई नहीं है। क्योंकि आजकल तलाक बहुत हो रहे है लोग अपनी नफरत को उजागर कर देते है। लेकिन प्यार और अपनापन दर्शाने से झिझकते है।
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