तलाक श्रंखला
पिछले सुख का दर्द
हम अपने अब के दुःख से जितने दुखी होते है। उससे ज्यादा अपने पिछले सुख से भी दुखी होते है। जो हमे अब नहीं मिल रहा। मेरी सखी बताती है। मैं अपने पति के साथ शादी से पहले जब भी घूम रही होती थी तब वह जहां फुलवाला दिखाई देता था तो मुझे गाड़ी रोककर फूल खरीद कर देता था। यदि उसकी निगाहो से फुलवाला ओझल हो जाता था। मेरे याद दिलाने पर गाड़ी मोड़कर वापिस उसके पास जाकर फूल खरीदकर देता था।
शादी के बाद मेरे फूल मांगने के बाद भी कभी फूल खरीद कर नहीं देता था । उसे मेरा बचपना कहकर टाल देता है।
शादी से पहले उसके पति का घर शाहदरा में था। करोलबाग के विद्यालय में नौकरी करती थी। उसका मायका जनकपुरी में था। उसका पति उसे छुट्टी होने पर रोज करोलबाग से जनकपुरी छोड़ने जाता था। उसे उस समय अपने आराम की कोई चिंता नहीं थी। आप सोच कर देखिये शाहदरा से करोलबाग होते हुए जनकपुरी जाने में कितना समय लगता होगा।
शादी के बाद उसने शाहदरा में स्थानांतरण करवा लिया। उसके ससुराल से विद्यालय का रास्ता मुश्किल से अपनी गाड़ी से केवल 5 मिनट का था। लेकिन उस 5 मिंट का समय उसके पति के पास नहीं था। जब सुबह गाड़ियां नहीं मिलती तब वही 5 मिनट का रास्ता कितने घंटो में बदल जाता है सोच कर देखिये। उसके साथ ही घर में खड़ी हुई गाड़ियों और सोते हुए लोगो को देखकर कितना गुस्सा आता होगा।
भारत में रहने वाले अधिकतर पतियों का यही हाल होता है। शादी से पहले जिसे इतने अधिक सपने दिखाए होते है उसके सपने शादी के बाद एक- एक करके तोडना शुरू कर दिया जाता है। उस हाड़मांस की लड़की को सब पत्थर की समझने लग जाते है।
जिस लड़की का दिल शादी से पहले किसी ने नहीं तोडा होता। उसका दिल पल -पल टूट रहा होता है। वह सिसक रही होती है। उसके आंसू निकल रहे होते है। लेकिन उन आंसुओ को मगरमच्छ के आंसू समझे जाते है।
उस औरत की टूटन एक दिन परिवार को भी तोड़ सकती है। .इसका अहसास उसके घर में रहते हुए किसी को नहीं होता।जब वह इसे बर्दास्त नहीं कर पाती .घर छोड़कर चली जाती है।
उसके जाने के बाद उन दिनों को वापिस पाना बहुत कठिन होता है। धीरे -धीरे वह भी पति के लिए कठोर होती जाती है। उसके आंसू उसकी अपनी आंख से नहीं निकल रहे होते बल्कि वह पूरे परिवार की आंख से निकलवा रही होती है। समय रहते उसके आंसुओ के दर्द को समझो।
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