# संस्कारो का विकास
हम सभी अच्छे संस्कारी बच्चे और समाज चाहते है। लेकिन ये मिलना संभव नहीं होता है। कुछ घरो में लोग हर तरह से सभी के मन को लुभाने वाले होते है। जबकि अन्य घरो में कुछ लोग ऐसे होते है जिन्हे कोई पसंद नहीं करता है। ये सब कैसे हो जाता है। भगवान किसी को गलत पैदा नहीं करता है। ये गलती कहाँ हो जाती है। ये सोचना जरूरी है।
जब बच्चा छोटा होता है हम उसे लाढ -प्यार से पालते है। उन्हें इतना अधिक प्यार देते है कि उसकी गलतियाँ नजरअंदाज कर देते है। दूसरो के सलाह देने पर हमे वह नागवार गुजरते है।उनसे सम्बन्ध तक तोड़ लेते है।
जब तक हम हालत को बदलने की सोचते है तब तक सब कुछ नियंत्रण से बाहर हो जाता है। हम हाथ मलते रह जाते है। सारी दुनियां को दोष देने लगते है।
आप सोच के हैरान रह जायेंगे कि अच्छे संस्कारो की बुनियाद बचपन से ही डाली जा सकती है। आप बच्चे के अच्छे आचरण को बढ़ाबा दीजिये। बुरी आदतों को नकार दीजिये। आप देखेंगे बच्चा अपने आप सुधरता जा रहा है। उसे अपने बड़ो के प्यार की जरूरत होती है। वह उनसे दूर रहना नहीं चाहता। उनसे दुरी उसे सजा लगती है। वह इस सजा से बचने के लिए सारी कोशिशे करने लगता है। अंतत: उसमे अपने आप अच्छे गुण आते जाते है।
आप अपने बच्चे को अच्छे विद्यालय में अच्छे गुणों के विकास के लिए ही भेजते है। उसके लिए अपनी हैसियत से भी जायदा खर्चने के लिए तैयार हो जाते है क्योंकि वहां बच्चे को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं दिया जाता बल्कि उसमें हर प्रकार के गुणों का विकास किया जाता है। किताबी ज्ञान तो कहीं से भी प्राप्त किया जा सकता है। अच्छे गुणों की जरूरत सभी नहीं दे सकते है। बच्चा कच्ची मिटटी के सामान होता है। उसे जिस रूप में ढालोगे वह वैसा ही बन जायेगा।
बच्चे में अच्छे गुणों के विकास का काम सबसे पहले घर, फिर विद्यालय के द्वारा किया जा सकता है। हम अच्छे नागरिक केवल समाज के लिए ही नहीं अपने भविष्य के लिए भी चाहते है।
जब हमारा शरीर कमजोर हो जाता है तब हमें दूसरो की मदद की जरूरत पड़ती है। तब हमे पता चलता है हमसे कितनी बड़ी गलती हो चुकी है। इसलिए हमे अभी से सावधान अपने कर्तव्यों के प्रति हो जाना चाहिए। जिससे अच्छे बच्चो और समाज का निर्माण हो सके। ये किसी एक इंसान के बस का कार्य नहीं है। हम सभी को कोशिश करनी पड़ेगी। यह बहुत मुश्किल नहीं है। कोशिश करके देखिये।
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