भयंकर मंजर
सभी विकसित देशो के समाचार देखने के बाद घबराहट होने लगी है। जिन देशो की स्वास्थ्य सुविधाओं के सभी देश कायल रहते थे। वहां मृत्यु का आंकड़ा इतना बड़ा हुआ है।
शबो को दफनाने का इंतजाम नहीं हो पा रहा। लाशे जगह -जगह पड़ी हुई दिखाई दे रही है। इन लाशो को दफनाने का इंतजार करना पड़ रहा है। ये शव अस्पताल, चर्च,गाड़ी में रखे है। आज देखा लेटिन अमरीकी देशो में बिना कॉफिन के ,कपड़ो में लिपटी हुई लाशे सड़क , छतो और घरो में पड़ी हुई है। लाशो के ऐसे मंजर की कल्पना करना, बहुत भयानक है। जबकि अब सच्चाई में दिखाई दे रहा है।
ऐसे में इन देशो को भी चीन के अनुसार नियमो में बदलाब करना चाहिए। यानि उनके अंतिम संस्कार जला कर करने में क्या बुराई है। क्योंकि महामारी में मारे इंसान का शब यदि इतने समय तक खुले में पड़ा रहेगा। तब उससे कितने और लोग संक्रमित होंगे। जबकि जलाने में इंसान के साथ वह वायरस भी जल कर खत्म हो जायेगा।
इन शहरो में ऐसी लाशो को देखकर आकाश में चील ,गिद्ध मडराने लगे है। इसे देखकर मुझे मौत से नहीं ,मरने से डर लगने लगा है। इन्हे बेगाने तो क्या ,अब अपने भी छूने से डरने लगे है।
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