गरीबो की फरियाद
रेहड़ी वालो को सरकार की तरफ से दस हजार लोन देने के बारे में कहा गया है। लेकिन ये लोग जब लोन लेने जाते है तब बैंक वाले सही तरह से इनसे बात करना जरूरी नहीं समझते। कम पढ़े लिखे और गरीब लोगो के मन में सरकारी कर्मचारियों का खौफ होता है।
सरकार बैंक वालो के सामने कर्ज देने से सम्बन्धित एक लक्ष्य निर्धारित करती है.जिसे पूरा करना जरूरी होता है। लेकिन गारंटर के आभाव में,पैसे मिलने की नाउम्मीदी के कारण ,जिनका पता किराये का मकान होता है। वे ऐसे अजनबियों को पैसे देने से डरते है। क्योंकि पैसे वसूली करना मुश्किल होता है।
बैंक वाले ऐसे वक्त में गरीब लेकिन जान -पहचान वालो को पैसा देकर अपना लक्ष्य पूरा करते है। इसलिए जरूरतमंद तक चाहते हुए मदद नहीं पहुंच पाती।
समाचारो में पैसो का जिक्र करते समय समाचार वाचक ने साथ में कहा भी था। -"यदि सरकार द्वारा दी राहत सही हाथो में पहुंचने लगे तब देश की तरक्की बहुत तेजी से होगी। "
लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पता।धोखेबाजी से बचने के लिए अनेक तरिके अपनाये जाते है। नौकरी सबको प्यारी होती है। मुश्किल से मिली नौकरी छोड़ना कोई पसंद नहीं करता ?

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