बहादुरी की मिसाल साझा चूल्हा
मैने बहुत सारे लोगो को दावत में जाकर शगन देते देखा था लेकिन वे शादी में खाना न खाने की बात करते थे। मुझे बहुत अजीब लगता था। समारोह में सज -संवर कर जाओ और बिना कुछ खाये आ जाओ। मुझे ऐसे लोगो के साथ समारोह में जाना बिलकुल अच्छा नहीं लगता था।
लेकिन आने वाला समय दुबारा से ऐसा आ गया है। जो अपने परिवार में करोना के कारण हादसा देख लेंगे वे बाहर के खाने से तौबा कर लेंगे।
अब तक मुझे जब कोई समारोह में बुलाता था तो मुझे लगता था वह मुझे इज्जत दे रहा है। लेकिन आने वाले समय में हम सोचने पर मजबूर हो जायेंगे की इज्जत अफजाई के लिए जाये या जिंदगी को गले लगाए।
मुझे लगता है काफी समय तक दावत में शानो शौकत दिखाना जरूरी नहीं रह जायेगा। बल्कि बहादुर लोग ही समारोह में शामिल हुआ करेंगे।

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