नेता बनाने का कारण
नेतृत्व के गुण सभी में नहीं होते है। जिसमे होते है वे बचपन से दिखाई देते है। पिछले दिनों मेरी किसी से बहस हो रही थी। उन्होंने कहा - " भारत की सारी जनता काम करती है लेकिन सारा श्रेय मोदी जी ले जाते है। "उसका गुस्सा सार्थक था। क्योंकि मोदी जी के पास अपना कहने लायक कुछ नहीं है। लेकिन हर जगह मोदी नाम आता है।
ऐसे में मुझे अंग्रेजो का समय याद आया. जब आजादी की लड़ाई चल रही थी। बहुत सारे गुट अलग -अलग लड़ रहे थे।
उनके आक्रोश को देखकर अंग्रेजो ने कहा -"तुम अपना एक नेता बात करने के लिए हमारे पास भेजो; हम बात करने के लिए तैयार है। यदि भीड़ में से सभी अपनी बात कहना चाहेंगे। उन सबके शोर में हमें सही बात समझ नहीं आएगी।" तब कांग्रेस का गठन हुआ था।
यदि आज सारे राज्य और प्रत्येक व्यक्ति अपने योगदान का अलग -अलग गुणगान करेगा। तो किस्मे इतनी सामर्थ्य है। जो इनके सामने खड़ा होकर उनकी बात सुनेगा।
बिना नेतृत्व क्षमता के हम 1857 की लड़ाई हार गए थे।
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