शराब की लत
ये आवश्यक सेवाओं में भी नहीं आते है। जिनको शराब की तलब हो वही पीते है। तलब के सामने घंटो लाइनों में खड़े होकर डंडे खाने के लिए भी तैयार है। इनकी लाइन दुकान खुलने से पहले कई जगह रात से ही लगनी शुरू हो जाती है। कल हमारे इलाके में सारी दुकाने शाम 5 बजे पुलिसवालो ने बंद करवा दी।
इसका कारण पूछने पर बताया। -" आप की दुकानों पर इतने ग्राहक नहीं आ रहे। जबकि शराब की दुकानों की भीड़ पर नियंत्रण रखने के लिए ज्यादा पुलिस की जरूरत है। "
कई जगह लोग पूरे महीने के हिसाब से बोतले खरीदते दिखे। जैसे इनके आभाव में मर जायेंगे।
कुछ देशो में वाहनों की कीमत कम होती है। लेकिन पैट्रॉल और डीजल की कीमत ज्यादा रखी जाती है ताकि टैक्स तो मिले , साथ ही सार्वजनिक वाहनों के इस्तेमाल की लोगो में आदत पड़े। इससे भीड़ और प्रदूषण में कमी आये। देखते है भारत में इसका क्या रूप दिखाई देता है।
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