आत्मनिर्भर भारत अभियान
आत्मनिर्भर भारत बनाने का सपना हमारे नेताओ ने देखा है। सभी आत्मनिर्भर होना चाहते है। लेकिन उसके लिए हमारी सरकारी व्यवस्था के काम काज को करने का तरीका बदलना होगा।
पुराने समय में सरकारी कर्मचारी जनता का नौकर होता था। जनता के काम में होने वाली कमियों को दूर करके उन्हें सही अंजाम तक पहुंचाने के लिए पूरी कोशिश करते थे।
अब वे गरीब तबके के लोगो की सहायता करने की जगह अपने को श्रेष्ठ साबित करने में लगे रहते है। दूसरो के दुखो को दूर करने की कोशिश नहीं करते। बल्कि शिकारी नजरो से देखते है इसे अपने जाल में कैसे फंसाया जाये और अधिकाधिक बसूला जाये।
पहले कर्मचारी अनपढ़ जनता की मदद के लिए तैयार रहते थे। लेकिन अब उन्हें अनेक तरिके से लूटने वाले अधिक होते है। भारत का माहौल ऐसा हो गया है कोई किसी पर भरोसा नहीं कर पा रहा।
फेरीवालों की मदद के लिए दिया जाने वाला कर्ज, किसानो की तरह उनके अकॉउंट में भेज दिया जाये उसका लाभ हो सकता है। वरना वह जरुरतमंदो तक कभी नहीं पहुंच सकेगा।
ऐसे समय में भारत आत्मनिर्भर कैसे बनेगा। जब मददगार ही लूटने में लगे है।

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