कमजोर का सख्त कदम
दूसरे विश्व युद्ध के समय तीन हारे हुए देशो पर, मित्र राष्ट्रो ने बहुत सारी पाबंदी लगाई थी। जिससे वो दुबारा शक्तिशाली होकर संसार को विश्व युद्ध की आग में न धकेल सके। इससे कोई और देश होता तो वह घुटनो पर आ जाता लेकिन जापान ने उसके बाद भी हिम्मत नहीं छोड़ी,लगातार विकास करता रहा।
आज वह विकसित देशो की श्रेणी में आता है। उनके दर्द की दास्ताँ जापान से ज्यादा कौन जान सकता है। जापान में आज भी मित्र देशो की सेना, उन के कामो पर पाबंदी लगाने के लिए रहती है। लेकिन उनका सारा खर्चा जापान को चुकाना पड़ता है।
हारे हुए देश के लोगो के लिए, विजीत देश के हर आदेश को मानना मजबूरी होती है। उसके बीच भी उन्होंने अपनी अस्मिता बचाये रखी।
अमरीका ने अपने देश के संतरे जबरदस्ती जापान की सरकार को लेने के लिए विवश किया। उन संतरो के जापान में आने के बाबजूद किसी जापानी ने उन्हें खरीदना जरूरी नहीं समझा। जबकि संतरे उनके देश के संतरो की अपेक्षा मीठे थे। वे पड़े -पड़े सड़ गए। उसके बाद अमरीका ने कभी ऐसी शर्त नहीं रखी।
जापान के लोग सरकार का विरोध करते समय काम छोड़कर नहीं बैठते बल्कि दुगुना काम करते है। बस बाँह पर काली पट्टी बांध लेते है।
उन्होंने अपने खानपान व्यायाम स्वास्थ्य सम्बन्धी आदतों पर किसी अन्य देश का असर नहीं होने दिया। वहां आज भी सभी अपने प्राचीन मूल्यों के साथ जी रहे है। उनकी तरक्की देखकर सलाम करने का मन करता है। सभी देश करोना के आक्रमण से तबाही के कगार पर पहुँच रहे है बस जापान के लोग उसके सामने बेबस नहीं दिखाई दे रहे।

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