तबलीगी जमात का व्यवहार
तब्लीगी जमात के बारे में हर समय जैसी खबरे आ रही है। वे मन को दुखी कर रही है। ये लोग अपने आप को हानि पहुंचाने के आलावा समाज को कितनी बड़ी छति पहुंचा रहे है। इसका अहसास नहीं है।तब्लीगी जमात के लोग छुपे हुए हुए है ,सामने नहीं आ रहे है। जब लेने जाओ तब उनके मजहब के लोग मारपीट करने लग रहे है। नर्सो और डॉक्टरों के साथ पुलिस बल भेजा जा रहा है। उन्हें ढूंढ कर क्वारंटीन किया जा रहा है।
इसमें साथ देने की जगह सेवा करने वाले लोगो को अनेक (खुले में नर्सो के सामने टट्टी करना ,अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करना ,खाना फेकना ,गाली देना, थूकना मांसाहारी खाने की मांग, कपड़े उतारना) तरह से आहत किया जा रहा है।
आप खुद सोचिये जब हम किसी अन्य के घर जाते है। ऐसे व्यवहार करने वाले के साथ कोन मेहमान नवाजी निभाता है। कोई अपने घर की औरतो को ऐसे इंसान के सामने आने देता है।
आज के हालात में घर में रहने वालो के पास अपने मनपसंद काम की जगह,नियमो के हिसाब से चलना पड़ रहा है . उसके आलावा चारा नहीं है। यदि घर के पुरुष लड़ कर ऐसा व्यवहार करना शुरू कर दे। आप सोचिये उनके साथ घर और बाहर केसा व्यवहार होगा।
अच्छा व्यवहार घर में होना मुश्किल हो रहा है। हर इंसान परिवार के साथ समझौता कर रहा है। ऐसे हालत में, हजारो की संख्या में क्वारंटीन हुए मुसलमानो की, उनकी पसंद के अनुसार कैसे खातिरदारी की जा सकती है।
अल्पसंख्यक आयोग के चैयरमेन जफरुल इस्लाम खान ने कहा है -"मुसलमानो के साथ बुरा सलूक हो रहा है। सारे अरब देशो के लोग सामने आकर उनकी मदद करे। "
इनके शब्दों को सुनकर लगता है पढ़ेलिखे और अनपढ़ सभी मुसलमानो की सोच समान है। इन्हे हालात से समझौता करना सिखाया नहीं जाता।
जिस समय में अपने लोगो के शब उठाने के लिए , लोग सामने नहीं आ रहे। मरीजों की तादाद बड़ी हुई है। ऐसे में उनकी मनमांगी मुराद पूरी करने वाले डॉक्टर ,नर्स, सफाईकर्मी,पुलिस सभी संक्रमित होकर क्वारंटीन हो रहे है या मौत की नींद सो रहे है। अपने घर नहीं जा पा रहे है। इस डर से कही उनका परिवार संक्रमित न हो जाये। उनका दर्द समझने की जगह ऐसा व्यवहार उनको तोड़ डालता है। उनकी मेहनत को सलाम करने की जगह दोष देना कहाँ का इंसाफ है।
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