पक्षियों का लौटना
डल झील बहुत बड़ी जगह में फैली हुई है। कहते है पहले की अपेक्षा यह केवल चौथाई रह गई है. उसकी अभी भी विराटता मन को लुभाती है। वहां अलग -अलग परिदृश्य दिखाई देते है। तैरते हुए पार्क, नेहरू पार्क और चारमीनार भी पार्क का नाम है।
इस झील के पास ही एक नहर भी बह रही थी। जो गंदे नाले के समान थी। जिससे शहर का गन्दा जल झील में न जा सके। उसके बाहर रहे। इसका नमूना मुझे डल झील के साफ पानी में दिखाई दिया। उसका पानी इतना साफ था कि पानी की वनस्पति साफ दिखाई दे रही थी। जैसे कांच में एक बगीचा उगाया गया हो। मै शिकारे में बैठ कर उसकी सुंदरता एकटक निहारती रही।
डल झील में एक तरफ बाजार था। लेकिन वहां का पानी गन्दा और बदबूदार था। क्योंकि उस तरफ मजबूत हाउसबोट और मजबूती लिए दुकाने बनी हुई थी। इस तरफ बहुत सारे लोग घूम रहे थे। वहां तैरती हुई दुकाने भी थी। तैरती हुई शिकारों रूपी दुकानों में लोग खाते रहे थे क्योंकि मुझे उस जगह बहुत बदबू आ रही थी। इस कारण मेरी कुछ भी खाने की इच्छा नहीं हुई।
अब लॉकडाउन में इंसानी पहुंच कम होने के कारण, वहां का पानी पहले से ज्यादा साफ हो गया है। पानी के पक्षी भी लौट आये है। सच में मैने डल झील में पहले कोई पक्षी नहीं देखा था। मेरा वास्ता वहां की ठण्ड और वर्षा से हुआ था। इन हालातो को देखकर लगता है वातावरण बिगड़ने का कारण केवल इंसान की गलत आदते है। धरती को बचाने का काम मानव को करना पड़ेगा वरना अनेक महामारियों से झूझने के लिए तैयार होना पड़ेगा।

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