वेद का छोटा बेटा शेखर को हमेशा सोनी में कमी दिखाई देती रहती थी। लेकिन कोई और उसके विचारो से संतुष्ट नही था। शेखर की उम्र शादी लायक हो गयी थी। शेखर की शादी की किसी को जल्दी नही थी। शेखर जल्दी शादी करना चाहता था। वेद लड़के वाले होने के कारण किसी के घर शादी के प्रस्ताव को भेजने से झिझक रहा था।
मनोज की शादी के लिए बहुत छोटी उम्र से रिश्ते आने शुरू हो गए थे। लेकिन शेखर के लिए 25 साल की उम्र तक कोई लड़की वाला रिश्ता लेकर नही आया था। सुकन्या की मौत के कारण कोई शेखर की शादी को लेकर उत्साहित नही था। शेखर ने सोनी जैसी लड़की में बहुत सारे अवगुण दिखा दिए थे जबकि सोनी का बाहरी रंग -रूप असाधारण था। सबको लगता था यदि इसके लिए लड़की देखने गए। लड़की में कोई कमी रह गयी तो ये सारा दोष हम पर लगा देगा। जब ये सोनी जैसी लड़की की सुंदरता को लेकर संतुष्ट नही है तो इसके लिए हूर की परी कहाँ से आएगी।
शेखर के लिए एक प्रस्ताव आया। वेद लड़की को अकेले देखने के बारे में सोचने से झिझक रहा था। अब तक सुकन्या के साथ उसने सारे निर्णय खुद लिए थे। इस समय उसे सुकन्या की कमी बहुत खल रही थी। उसने इस समय अपनी बड़ी बेटी सुमन को लड़की देखने के लिए बुला लिया।सुमन शेखर के विचार जानती थी उसका इरादा इस मामले में सामने आने का नही था लेकिन वेद की परेशानी समझ कर उसने हाँ कर दी। शेखर के साथ सुमन लड़की वालो के घर गयी ।
वहाँ शेखर और सुमन का बहुत आवभगत हुआ । सुमन ने लड़की देखने की इच्छा जाहिर की। वे उसे एक कमरे में ले गए। वहाँ कन्या बैठी हुई थी। सुमन ने लड़की को देखा। लड़की का रंग बहुत गोऱा था। उसके नैननक्श बहुत अच्छे थे। उसके बाल बहुत लम्बे और काले थे। शेखर उस लड़की को देखकर सम्मोहित हो गया।
सुमन ने लड़की के पास बैठने के बारे में कहा तो शेखर बोल उठा- अब लड़की देख ली है हमें यहाँ बैठने की क्या जरूरत है..हमारे बैठने से ये शर्मा जाएगी। हम दूसरे कमरे में चलते है।
वह सुमन को जबरदस्ती दूसरे कमरे में ले आया। सुमन का इरादा उस लड़की से बात करने का था। वह चाहती थी उसके बारे में कुछ जानकारी मिल जाती। उसका जिंदगी के बारे में नजरिया क्या है। उसके विचार हमारे जैसे है या अलग है। उसके साथ शेखर सही ढंग से जिंदगी गुजार पायेगा या नही।
सुमन उसे खड़ा करके चलवा के देखना चाहती थी। उसके लिए ये अजूबा था कि लड़की को कमरे में बैठा दिया गया था। और लड़के वालो को दूसरे कमरे में चलने के लिए कहा गया था। उसने अपने जीवन में इससे पहले ऐसा कभी नही देखा था। उसके गले से ये सब नही उत्तर रहा था। अब तक जब भी लड़की को दिखाया जाता था। लड़की लड़के वालो के सामने चलकर आती थी। उसने कमरे में बैठी हुई लड़की देखने की कल्पना नही की थी।
उसका मन अभी निर्णय करने का नही था। लेकिन शेखर उस लड़की की सुंदरता को देखकर मंत्रमुग्ध हो गया था।
सुमन से लड़की वालो ने जबाब माँगा। सुमन अभी जबाब देने से बचना चाहती थी। लेकिन शेखर ने उसे हाँ कहने के लिए विवश कर दिया। उपरी तोर पर लड़की में कोई कमी नही थी। इसलिए सुमन ने अपनी रजामंदी दे दी। सब खुश हो गए। वेद को सुमन के सही निर्णय पर भरोसा था। शादी की तेयारिया शुरू कर दी गयी।
शादी के बाद रचना घर आई तो सबको उसका कद देखकर बहुत हैरानी हुई उसका कद पांच फीट से कम था जबकि शेखर का कद ५"9 इंच था। शेखर को बहुत गुस्सा आया। ये कैसे हो गया। उसने इस बात की कल्पना नही की थी। उसने सब कुछ अच्छा होगा सोचा था।
रचना के बोलने पर उसकी आवाज की कमी पता चली। उसकी आवाज सुनने में साफ नही थी। उसकी बात सुनने के लिए बहुत प्रयास करना पड़ता था। नया इंसान उसकी बात का मतलब समझ नही पाता था। अक्सर लोग उससे बात करने से बचने की कोशिश करते थे।
शेखर सारा दोष सुमन पर मढ़ने लगा। उसके कहने पर मेने हाँ की थी। उसने मेरे साथ धोखा किया। सुमन अपना पक्ष रखती। अब दोनों के सम्बन्धो में कड़वाहट आ गयी थी।
उसने कहा -में माँ नही थी मै केवल बहन थी। माँ के सामान अड़ नही सकती थी। मेरे मन में पहले ही ऐसे विचार आ रहे थे। लेकिन इसके जोर देने पर मेने ज्यादा कहना ठीक नही समझा।
अब सबको सुकन्या की याद आ रही थी। वह अपने सामने कभी ऐसा नही होने देती। वह हर तरह से संतुष्ट होने के बाद ही हाँ करती। एक माँ अपने बच्चो के लिए सारी दुनिया से टकरा जाती है.ऐसे कहते है रिश्ते स्वर्ग में बनते है ,केवल धरती पर निभाए जाते है। शेखर और रचना का रिश्ता देखकर उस बात की सच्चाई पर यकीन पक्का हो जाता है।
मनोज की शादी के लिए बहुत छोटी उम्र से रिश्ते आने शुरू हो गए थे। लेकिन शेखर के लिए 25 साल की उम्र तक कोई लड़की वाला रिश्ता लेकर नही आया था। सुकन्या की मौत के कारण कोई शेखर की शादी को लेकर उत्साहित नही था। शेखर ने सोनी जैसी लड़की में बहुत सारे अवगुण दिखा दिए थे जबकि सोनी का बाहरी रंग -रूप असाधारण था। सबको लगता था यदि इसके लिए लड़की देखने गए। लड़की में कोई कमी रह गयी तो ये सारा दोष हम पर लगा देगा। जब ये सोनी जैसी लड़की की सुंदरता को लेकर संतुष्ट नही है तो इसके लिए हूर की परी कहाँ से आएगी।
शेखर के लिए एक प्रस्ताव आया। वेद लड़की को अकेले देखने के बारे में सोचने से झिझक रहा था। अब तक सुकन्या के साथ उसने सारे निर्णय खुद लिए थे। इस समय उसे सुकन्या की कमी बहुत खल रही थी। उसने इस समय अपनी बड़ी बेटी सुमन को लड़की देखने के लिए बुला लिया।सुमन शेखर के विचार जानती थी उसका इरादा इस मामले में सामने आने का नही था लेकिन वेद की परेशानी समझ कर उसने हाँ कर दी। शेखर के साथ सुमन लड़की वालो के घर गयी ।
वहाँ शेखर और सुमन का बहुत आवभगत हुआ । सुमन ने लड़की देखने की इच्छा जाहिर की। वे उसे एक कमरे में ले गए। वहाँ कन्या बैठी हुई थी। सुमन ने लड़की को देखा। लड़की का रंग बहुत गोऱा था। उसके नैननक्श बहुत अच्छे थे। उसके बाल बहुत लम्बे और काले थे। शेखर उस लड़की को देखकर सम्मोहित हो गया।
सुमन ने लड़की के पास बैठने के बारे में कहा तो शेखर बोल उठा- अब लड़की देख ली है हमें यहाँ बैठने की क्या जरूरत है..हमारे बैठने से ये शर्मा जाएगी। हम दूसरे कमरे में चलते है।
वह सुमन को जबरदस्ती दूसरे कमरे में ले आया। सुमन का इरादा उस लड़की से बात करने का था। वह चाहती थी उसके बारे में कुछ जानकारी मिल जाती। उसका जिंदगी के बारे में नजरिया क्या है। उसके विचार हमारे जैसे है या अलग है। उसके साथ शेखर सही ढंग से जिंदगी गुजार पायेगा या नही।
सुमन उसे खड़ा करके चलवा के देखना चाहती थी। उसके लिए ये अजूबा था कि लड़की को कमरे में बैठा दिया गया था। और लड़के वालो को दूसरे कमरे में चलने के लिए कहा गया था। उसने अपने जीवन में इससे पहले ऐसा कभी नही देखा था। उसके गले से ये सब नही उत्तर रहा था। अब तक जब भी लड़की को दिखाया जाता था। लड़की लड़के वालो के सामने चलकर आती थी। उसने कमरे में बैठी हुई लड़की देखने की कल्पना नही की थी।
उसका मन अभी निर्णय करने का नही था। लेकिन शेखर उस लड़की की सुंदरता को देखकर मंत्रमुग्ध हो गया था।
सुमन से लड़की वालो ने जबाब माँगा। सुमन अभी जबाब देने से बचना चाहती थी। लेकिन शेखर ने उसे हाँ कहने के लिए विवश कर दिया। उपरी तोर पर लड़की में कोई कमी नही थी। इसलिए सुमन ने अपनी रजामंदी दे दी। सब खुश हो गए। वेद को सुमन के सही निर्णय पर भरोसा था। शादी की तेयारिया शुरू कर दी गयी।
शादी के बाद रचना घर आई तो सबको उसका कद देखकर बहुत हैरानी हुई उसका कद पांच फीट से कम था जबकि शेखर का कद ५"9 इंच था। शेखर को बहुत गुस्सा आया। ये कैसे हो गया। उसने इस बात की कल्पना नही की थी। उसने सब कुछ अच्छा होगा सोचा था।
रचना के बोलने पर उसकी आवाज की कमी पता चली। उसकी आवाज सुनने में साफ नही थी। उसकी बात सुनने के लिए बहुत प्रयास करना पड़ता था। नया इंसान उसकी बात का मतलब समझ नही पाता था। अक्सर लोग उससे बात करने से बचने की कोशिश करते थे।
शेखर सारा दोष सुमन पर मढ़ने लगा। उसके कहने पर मेने हाँ की थी। उसने मेरे साथ धोखा किया। सुमन अपना पक्ष रखती। अब दोनों के सम्बन्धो में कड़वाहट आ गयी थी।
उसने कहा -में माँ नही थी मै केवल बहन थी। माँ के सामान अड़ नही सकती थी। मेरे मन में पहले ही ऐसे विचार आ रहे थे। लेकिन इसके जोर देने पर मेने ज्यादा कहना ठीक नही समझा।
अब सबको सुकन्या की याद आ रही थी। वह अपने सामने कभी ऐसा नही होने देती। वह हर तरह से संतुष्ट होने के बाद ही हाँ करती। एक माँ अपने बच्चो के लिए सारी दुनिया से टकरा जाती है.ऐसे कहते है रिश्ते स्वर्ग में बनते है ,केवल धरती पर निभाए जाते है। शेखर और रचना का रिश्ता देखकर उस बात की सच्चाई पर यकीन पक्का हो जाता है।
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