हमारा लोकतान्त्रिक देश विशेष लोगो को इतनी ज्यादा सहूलियतें देने की कोशिश कर रहा है कि उन्हें देखकर सामान्य वर्ग के मन में कड़वाहट भर्ती जा रही है। जब जाति के आधार पर सहूलियतें दी जाती है। तो जिन लोगो को सहूलियतें नही मिलती उनके अंदर आक्रोश भर जाता है। उनके सवालो के जबाब देने हम जैसे लोगो के लिए मुश्किल हो जाते है। जैसे कक्षा 12 के sc छात्रों को बोर्ड फ़ीस 50 रूपये देनी होती है। जबकि सामान्य वर्ग के बच्चो को 445 रूपये देने होते है। वे इस का विरोध करते है।
मेने अपने आस -पास बहुत से सामान्य वर्ग के गरीब बच्चे देखे है जो पढ़ने में अच्छे है लेकिन उनके घर में पैसे की कमी है वे बोर्ड की फीस भरने से लाचार है हम जैसे संवेदनशील लोग उनके लिए पैसो का प्रबंध करते है।
उनकी लाचारी हमें सोचने पर मजबूर कर देती है। इन सर्वश्रेष्ठ बच्चो का भविष्य पैसो की कमी के कारण बर्बाद हो जायेगा। अभी तो कम फ़ीस होने के कारण हम जैसे लोग मदद कर देते है। आगे की पढ़ाई महगी होने के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़कर घर बैठना पड़ेगा। उनका उज्ज्वल भविष्य घर की चार -दीवारी तक सीमित रह जायेगा।
सरकार को मेधावी और गरीब बच्चो की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। सामान्य वर्ग के गरीब लोगो को भी आगे बढ़ने के मौके मिलने चाहिए। उनका समाज गरीब लोगो को मुँह नही लगाता। सभी वर्गों के गरीब लोगो की जाति एक सामान होती है.अमीर लोग अपने गरीब रिश्तेदारो से मिलना भी पसंद नही करते। ऐसे में उनकी ऊँची जाति के लोग या उनकी जाति उनका पेट नही भर्ती। उनकी ऊँची जाति का गौरव उनके उपहास का कारण बन जाता है।
छोटी जाति के अमीर लोग वैसे तो अपने को सर्वे सर्वा समझने लगते है। लेकिन जब उनके बच्चो को सहूलियतें मिलने लगती है तो वे उसे किसी हालत में छोड़ना नही चाहते। मेने संपन्न लोगो को भी फर्जी कागज बनवा कर सारी सहूलियतें लेते देखा है।
भारत में भ्रष्टाचार का बोलबाला होने के कारण साधन -संपन्न लोग अपने और अपने परिवार के लिये सारी सहूलियतें प्राप्त कर लेते है।
गरीब लोगो तक आज भी सरकारी रियायतें नही पहुँच पाती। क्योंकि जो अनपढ़ लोग है। उन्हें हर कदम पर ठोकरे खानी पड़ती है। उन्हें अपमान का सामना करना पड़ता है। उनकी हिम्मत इतने मुश्किल हालतो का सामना नही कर पाती। उनके अंदर आत्मविश्वास की कमी होने के कारण वे जिंदगी से समझोता करके रह जाते है। वे और उनका परिवार आज भी सरकार की दी रियायतों से महरूम है।
इसलिए ये कहना उचित है -सरकार को गरीबी के आधार पर रियायतें देनी चाहिए। इस के लिए कोई ठोस कदम उठाने की जरूरत है। जाति के आधार पर बनायीं गयी व्यवस्था अब लचर हो चुकी है।
बच्चो को जब जाति के आधार पर स्कालरशिप दी जाती है तो हमें बहुत अजीव लगता है जब हम बच्चो से खास तौर पर पूछते है तुम्हारी जाति क्या है। इस जाति व्यवस्था ने हमें कई टुकड़ो में बाँट दिया है.
इस जाति व्यवस्था के कारण हम सोचने पर मजबूर हो जाते है। जब मेरी शादी हुई तो मैने शादी से पहले का उपनाम लगाना उचित नही समझा। मेने अपना उपनाम लगाना बंद कर दिया। इस कारण कुछ लोग विशेष तौर से अलग से मेरी जाति दुसरो से पूछते। मै सभी जातियों के साथ सामान व्यवहार करती थी इस कारण मुझ पर भी लोगो को शक होने लगा।अंतत मुझे अपना शादी के बाद का उपनाम लगाना पड़ा।
इस के कारण सभी दुबारा से जाति के चक्रव्यूह में फंस कर अपना उपनाम लगाने के लिए मजबूर हो जाते है.. जहा तक मेरा विचार है जाति का कलंक हमें आत्म विश्वास से जीने नही देता। जो विशेष जाति के लोग है वे सम्मानित जीवन जीना चाहते है . लेकिन वे सहूलियतें छोड़ना नही चाहते।हो सकता है इस कारण आने वाले समय में गुजरात के समान सारे भारत में विस्फोटक स्थिति पैदा हो जाये।
इससे बचने के लिए सरकार को आर्थिक आधार पर सहूलियतें दी जानी चाहिए। आज ५० % के आस -पास आरक्षण है। जिस हिसाब से हर समुदाय आरक्षण की मांग कर रहा है आने वाले समय में हर समुदाय आरक्षित हो जायेगा। फिर से पुराना जाति वाद का दंश हमे बंधनो में बंधने के लिए मजबूर कर देगा। इसलिए जाति की जगह आर्थिक आरक्षण होना चाहिए।
मोदी जी से मेरा अनुरोध है -जैसे उन्होंने सभी गरीबो के लिए बेंको में जनधन योजना चलायी ऐसी ही किसी योजना का आरम्भ करे। जिससे सभी गरीब लोगो को सामान उन्नति के अवसर मिल सके।
मेने अपने आस -पास बहुत से सामान्य वर्ग के गरीब बच्चे देखे है जो पढ़ने में अच्छे है लेकिन उनके घर में पैसे की कमी है वे बोर्ड की फीस भरने से लाचार है हम जैसे संवेदनशील लोग उनके लिए पैसो का प्रबंध करते है।
उनकी लाचारी हमें सोचने पर मजबूर कर देती है। इन सर्वश्रेष्ठ बच्चो का भविष्य पैसो की कमी के कारण बर्बाद हो जायेगा। अभी तो कम फ़ीस होने के कारण हम जैसे लोग मदद कर देते है। आगे की पढ़ाई महगी होने के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़कर घर बैठना पड़ेगा। उनका उज्ज्वल भविष्य घर की चार -दीवारी तक सीमित रह जायेगा।
सरकार को मेधावी और गरीब बच्चो की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। सामान्य वर्ग के गरीब लोगो को भी आगे बढ़ने के मौके मिलने चाहिए। उनका समाज गरीब लोगो को मुँह नही लगाता। सभी वर्गों के गरीब लोगो की जाति एक सामान होती है.अमीर लोग अपने गरीब रिश्तेदारो से मिलना भी पसंद नही करते। ऐसे में उनकी ऊँची जाति के लोग या उनकी जाति उनका पेट नही भर्ती। उनकी ऊँची जाति का गौरव उनके उपहास का कारण बन जाता है।
छोटी जाति के अमीर लोग वैसे तो अपने को सर्वे सर्वा समझने लगते है। लेकिन जब उनके बच्चो को सहूलियतें मिलने लगती है तो वे उसे किसी हालत में छोड़ना नही चाहते। मेने संपन्न लोगो को भी फर्जी कागज बनवा कर सारी सहूलियतें लेते देखा है।
भारत में भ्रष्टाचार का बोलबाला होने के कारण साधन -संपन्न लोग अपने और अपने परिवार के लिये सारी सहूलियतें प्राप्त कर लेते है।
गरीब लोगो तक आज भी सरकारी रियायतें नही पहुँच पाती। क्योंकि जो अनपढ़ लोग है। उन्हें हर कदम पर ठोकरे खानी पड़ती है। उन्हें अपमान का सामना करना पड़ता है। उनकी हिम्मत इतने मुश्किल हालतो का सामना नही कर पाती। उनके अंदर आत्मविश्वास की कमी होने के कारण वे जिंदगी से समझोता करके रह जाते है। वे और उनका परिवार आज भी सरकार की दी रियायतों से महरूम है।
इसलिए ये कहना उचित है -सरकार को गरीबी के आधार पर रियायतें देनी चाहिए। इस के लिए कोई ठोस कदम उठाने की जरूरत है। जाति के आधार पर बनायीं गयी व्यवस्था अब लचर हो चुकी है।
बच्चो को जब जाति के आधार पर स्कालरशिप दी जाती है तो हमें बहुत अजीव लगता है जब हम बच्चो से खास तौर पर पूछते है तुम्हारी जाति क्या है। इस जाति व्यवस्था ने हमें कई टुकड़ो में बाँट दिया है.
इस जाति व्यवस्था के कारण हम सोचने पर मजबूर हो जाते है। जब मेरी शादी हुई तो मैने शादी से पहले का उपनाम लगाना उचित नही समझा। मेने अपना उपनाम लगाना बंद कर दिया। इस कारण कुछ लोग विशेष तौर से अलग से मेरी जाति दुसरो से पूछते। मै सभी जातियों के साथ सामान व्यवहार करती थी इस कारण मुझ पर भी लोगो को शक होने लगा।अंतत मुझे अपना शादी के बाद का उपनाम लगाना पड़ा।
इस के कारण सभी दुबारा से जाति के चक्रव्यूह में फंस कर अपना उपनाम लगाने के लिए मजबूर हो जाते है.. जहा तक मेरा विचार है जाति का कलंक हमें आत्म विश्वास से जीने नही देता। जो विशेष जाति के लोग है वे सम्मानित जीवन जीना चाहते है . लेकिन वे सहूलियतें छोड़ना नही चाहते।हो सकता है इस कारण आने वाले समय में गुजरात के समान सारे भारत में विस्फोटक स्थिति पैदा हो जाये।
इससे बचने के लिए सरकार को आर्थिक आधार पर सहूलियतें दी जानी चाहिए। आज ५० % के आस -पास आरक्षण है। जिस हिसाब से हर समुदाय आरक्षण की मांग कर रहा है आने वाले समय में हर समुदाय आरक्षित हो जायेगा। फिर से पुराना जाति वाद का दंश हमे बंधनो में बंधने के लिए मजबूर कर देगा। इसलिए जाति की जगह आर्थिक आरक्षण होना चाहिए।
मोदी जी से मेरा अनुरोध है -जैसे उन्होंने सभी गरीबो के लिए बेंको में जनधन योजना चलायी ऐसी ही किसी योजना का आरम्भ करे। जिससे सभी गरीब लोगो को सामान उन्नति के अवसर मिल सके।
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