वेद की तबियत काफी खराब हो गयी डॉ ने उन्हें दिल की बीमारी बता दी। साथ ही बहुत बड़ा खर्चा इस इलाज के लिए बताया। जिसे सुनकर वेद ने साफ मना कर दिया।
उन्होंने कहा -इतना जी चुका। और अधिक जी कर क्या करूँगा। आज भी मरना है कल भी मरना है। मै अपने इलाज पर इतनी मुश्किल से कमाया पैसा खर्च नही करूँगा।
वेद की इस बात को सुनकर सुमन को बहुत गुस्सा आया। वह बोली -यह पैसा आपने कमाया है। आप किसी से अपने इलाज के लिए पैसे नही मांग रहे हो। आपको केवल अपनी बीमारी पर पैसा खर्च करना है। यह इलाज आपको अवश्य करवाना पड़ेगा।
निराश वेद को अपना इलाज करवाने के लिए सुमन ने बहुत जोर देकर तैयार किया। वेद को इस इलाज के बाद अपने जीवित आने की उम्मीद नही थी। इसलिए उसने अपनी फैक्टरी नरेश के नाम कर दी। यदि उसे इस दरम्यान कुछ हो जाये तो नरेश को इस फैक्टरी में आने से कोई रोक नही पाये। वेद को देखकर नरेश को जीवन मिल जाता था। उसे भी लगने लगा था। उसका और दादाजी का साथ अब अंत की तरफ है। दादाजी कुछ समय के मेहमान है। नरेश के चेहरे पर उदासी दिखाई देने लगी थी। वह हर समय दादाजी की तीमारदारी में लगा रहता था। .
वेद का इलाज सही हो गया। वह अस्पताल से ठीक हो कर घर आ गए। इन सबके कारण वेद काफी कमजोर दिखने लगे थे। उन्हें तंदरुस्त होने में काफी समय लग गया। लेकिन अब वे फिर से तंदरुस्त होकर कारखाने जाने लगे।
वेद को देखकर सबको बहुत हैरानी होती थी। उनको कार्यरत देख कर लोग उनकी उम्र का अंदाजा नही लगा पाते थे। उनकी जिजीविषा देखकर लोग अचंभित रह जाते थे। वे पोते के उठने का इंतजार नही करते थे। वे उससे पहले ही उठ कर तैयार होकर कारखाने पहुँच जाते थे।
वे कहते थे -जब मालिक समय से पहले आ जाये तो नौकरो को भी समय का पावंद होना पड़ता है। वेद हमेशा बस से कारखाने जाते थे। जवानी में वेद मोटर साइकिल चलाते थे। उम्र बढ़ने के बाद उन्होंने गाड़ी चलाना बंद कर दिया था। अब उन्हें बस का सहारा था।
वेद को बस से सफर करते देख और नरेश को गाड़ी चलाते देख कर लोग उनको उनकी उम्र का वास्ता देकर कहते थे- पोता गाड़ी में आता है दादा बस में ये कैसे।
उन्होंने नरेश के खिलाफ कभी कुछ नही कहा बल्कि उसका पक्ष लेते हुए कहते -वह जवान है उसकी सुबह नींद नही खुलती है। मै बूढ़ा हो चुका हूँ। मुझे देर तक नींद नही आती। मै घर में बिस्तर पर रहकर परेशान हो जाता हूँ। इसलिए उसे परेशान किये बिना खुद चला आता हूँ। मेरी बरसो से यही दिनचर्या रही है। वह तो अभी मेरे पास आया है। नामालूम कब तक मेरे पास रहेगा। ये भी मुझे मालूम नही इसलिए मै उस पर निर्भर नही रहना चाहता हूँ।
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उन्होंने कहा -इतना जी चुका। और अधिक जी कर क्या करूँगा। आज भी मरना है कल भी मरना है। मै अपने इलाज पर इतनी मुश्किल से कमाया पैसा खर्च नही करूँगा।
वेद की इस बात को सुनकर सुमन को बहुत गुस्सा आया। वह बोली -यह पैसा आपने कमाया है। आप किसी से अपने इलाज के लिए पैसे नही मांग रहे हो। आपको केवल अपनी बीमारी पर पैसा खर्च करना है। यह इलाज आपको अवश्य करवाना पड़ेगा।
निराश वेद को अपना इलाज करवाने के लिए सुमन ने बहुत जोर देकर तैयार किया। वेद को इस इलाज के बाद अपने जीवित आने की उम्मीद नही थी। इसलिए उसने अपनी फैक्टरी नरेश के नाम कर दी। यदि उसे इस दरम्यान कुछ हो जाये तो नरेश को इस फैक्टरी में आने से कोई रोक नही पाये। वेद को देखकर नरेश को जीवन मिल जाता था। उसे भी लगने लगा था। उसका और दादाजी का साथ अब अंत की तरफ है। दादाजी कुछ समय के मेहमान है। नरेश के चेहरे पर उदासी दिखाई देने लगी थी। वह हर समय दादाजी की तीमारदारी में लगा रहता था। .
वेद का इलाज सही हो गया। वह अस्पताल से ठीक हो कर घर आ गए। इन सबके कारण वेद काफी कमजोर दिखने लगे थे। उन्हें तंदरुस्त होने में काफी समय लग गया। लेकिन अब वे फिर से तंदरुस्त होकर कारखाने जाने लगे।
वेद को देखकर सबको बहुत हैरानी होती थी। उनको कार्यरत देख कर लोग उनकी उम्र का अंदाजा नही लगा पाते थे। उनकी जिजीविषा देखकर लोग अचंभित रह जाते थे। वे पोते के उठने का इंतजार नही करते थे। वे उससे पहले ही उठ कर तैयार होकर कारखाने पहुँच जाते थे।
वे कहते थे -जब मालिक समय से पहले आ जाये तो नौकरो को भी समय का पावंद होना पड़ता है। वेद हमेशा बस से कारखाने जाते थे। जवानी में वेद मोटर साइकिल चलाते थे। उम्र बढ़ने के बाद उन्होंने गाड़ी चलाना बंद कर दिया था। अब उन्हें बस का सहारा था।
वेद को बस से सफर करते देख और नरेश को गाड़ी चलाते देख कर लोग उनको उनकी उम्र का वास्ता देकर कहते थे- पोता गाड़ी में आता है दादा बस में ये कैसे।
उन्होंने नरेश के खिलाफ कभी कुछ नही कहा बल्कि उसका पक्ष लेते हुए कहते -वह जवान है उसकी सुबह नींद नही खुलती है। मै बूढ़ा हो चुका हूँ। मुझे देर तक नींद नही आती। मै घर में बिस्तर पर रहकर परेशान हो जाता हूँ। इसलिए उसे परेशान किये बिना खुद चला आता हूँ। मेरी बरसो से यही दिनचर्या रही है। वह तो अभी मेरे पास आया है। नामालूम कब तक मेरे पास रहेगा। ये भी मुझे मालूम नही इसलिए मै उस पर निर्भर नही रहना चाहता हूँ।
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