वेद ने बच्चो की शादी करने के बाद शांति से अपना जीवन बिताने के बारे में सोचा । उसके जीवन के सभी उद्देश्य पूरे हो गए थे। उसकी उम्र हो गयी थी।
इतने में उसने किसी से सुना उसके बेटे कह रहे थे -ये कारखाना हमारी माँ के नाम था। माँ के मरने के बाद इस पर हमारा अधिकार है। पिताजी हम पर फालतू का रौब जमाते है। हम इनके खिलाफ कोर्ट में जायेंगे।
इस बात को जानकर वेद को बहुत दुःख हुआ। उसने इन्ही बेटो के लिए दिन रात मेहनत करके दो कारखाने शुरू किये । लोग उसकी हिम्मत की दाद देते थे। वेद ने किसी की सहायता लिए बिना अपनी मेहनत के जरिये दो कारखाने खड़े कर दिए। दोनों को अलग -अलग कारखानो का मालिक बना दिया। उसके बेटे उसकी मेहनत की इज्जत करने के स्थान पर कोर्ट जाकर सब कुछ छीन लेना चाहते है।
उसने अपने दिल का दर्द किसी से नही कहा। उसने दोनों कारखानो में जाना बंद कर दिया। उसके किसी बेटे ने उनके कारखाने में ना आने का कारण पूछा। उनके पिता कहाँ से खा पी रहे हे.इस बारे में किसी से कोई चर्चा नही की। दोनों को पिता के ना आने और खाने पीने की चिंता नही थी।
उसे सुकन्या का दुःख अब और भी ज्यादा सताने लगा। यदि सुकन्या होती तो वह इन दोनों बेटो के सामने सख्ती से खड़ी हो जाती। दुसरो के सामने वेद के लिए आसमान सर पर उठा लेती। उन दोनों बेटो को ऐसा किसी हालत में नही करने देती। वह वेद के लिए दुनियाँ से लड़ जाती। वह वेद के अकेलेपन का साथी होती।
बेटियाँ अपने घर बार की हो चुकी थी। माँ के मरने के बाद वे बहुत कम घर आती थी। इसलिए उन्हें इस बारे में कुछ भी पता नही चला। वेद के पास जब कुछ नहीं बचा। उसके दोनों बेटे उसके पास मनाने नही आये। तो एक दिन वेद अपनी बेटी हिना से कुछ पैसे माँगने लगा तब उसे घर के हालत पता चले। उसे सब सुनकर बहुत दुःख हुआ। उसकी बेटी को बहुत गुस्सा आया।
वह बोली - सब कुछ आपका लगाया हुआ है। वह आपसे कैसे सबकुछ छीन सकते है। में उनसे इस बारे में बात करूंगी।
वेद बोला -मै नही चाहता जिन बेटो के लिए मेने अपना सारा जीवन लगा दिया। वे बेटे सामान के लिए कोर्ट में जाये। में कोर्ट -कचहरी से बचने के लिए सब कुछ छोड़ कर आ गया हूँ। मै नही चाहता दुनियाँ हमारा मजाक बनाये। बाप इतना सख्त था कि उससे सब कुछ लेने के लिए बेटो को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। में लोगो को हँसने का मौका नही देना चाहता।
हिना बोली -आपको लगता है। वे कोर्ट में मुकदमा जीत जायेंगे। उन्हें ये नही पता जो कुछ आज माँ का कहलाता है। वह माँ ने अर्जित नही किया। वे तो अनपढ़ थी आप के बिना अकेले समाज का सामना करने में अक्षम थी वह अकेले कारखाना कैसे शुरू कर सकती थी। उन्हें उपहार के रूप में कुछ नही मिला। यह पैतृक सम्पत्ति नही है जिस पर वे अपना अधिकार जमा रहे है ये सब कुछ आपकी मेहनत का फल है। आप हमें बोलने का मौका दो। हम उन्हें समझायेंगे।
वेद बोला - उनके मन में बाप के लिए सम्मान नही है। में नही चाहता उन्हें इस बात की याद दिलाई जाये। मुझे उन लोगो की दया पर रहना पसंद नही है। वे मुझे अब फालतू का इंसान समझने लगे है जो जबरदस्ती उनके साथ जुड़ने की कोशिश कर रहा है। मेरे हाथ पैर चलते है। मै खुद अपने लिए नया रास्ता ढूंढ लूंगा।
हिना बोली -आपकी उम्र 70 साल की हो रही है। आप इस उम्र में नया कारखाना खोलने की हिम्मत जुटा रहे हे। ये काम उन दोनों बेटो को करने दो। आप अपना काम मत छोडो। सारी जिंदगी आपने मेहनत की है। इस समय लोग आराम करते है। सरकार भी ६० साल के इंसान को रिटायर कर देती है। आप इस समय ७० साल के हो रहे हो। अपनी उम्र का विचार करके देखो। आप अकेले नही हो आपके लिए में दोनों भाइयो का सामना करने के लिए तैयार हूँ।
वेद बोला -मेरी गैरत मुझे मना कर रही है। इसलिए तुम भी इस मामले में चुप रहो। जब मुझे तुम्हारी जरूरत होगी ,मै तुम्हे बता दूंगा। हम लोगो में कोई लड़ाई नही हुई है। जिसे सुलझाने के लिए किसी और की जरूरत पड़े। मेने सब कुछ अपनी मर्जी से छोड़ दिया है। में अपने भाग्य से एक बार फिर से लड़ना चाहता हूँ। क्या भगवान इस उम्र में भी मेरा साथ देंगे।
वेद फिर से नयी मंजिल की तलाश में निकल पड़े।
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