मनोज अपनी जगह दुसरो को बदलना चाहता था। इस कारण वह दिनों -दिन परेशान होता जा रहा था। उसको सभी समझाने की कोशिश करते लेकिन वह चाहता दूसरे उसके हिसाब से चले। ऐसा होना अब संभव नही था।
वह सबसे कहता -मै किसी दिन आत्महत्या कर लूंगा।
किसी को उसकी बात पर यकीन नही आता था क्योंकि वेद के परिवार ने कष्टो का सामना किया था। वेद ने कई दुर्घटनाओ का सामना करने के बाद भी अपने अंदर के जुझारूपन के कारण हर समस्या से बाहर निकल आये थे।इस कारण सब को लगता मनोज सबका ध्यान अपनी तरफ खीचने के लिए ऐसा बोलता है। ऐसे पिता का बेटा आत्महत्या नही कर सकता।
वेद का 75 जन्मदिन धूम धाम से मनाया जा रहा था। मनोज के चेहरे की सारी रौनक खत्म हो चुकी थी। उस दिन भी मनोज जिससे भी मिलता आत्महत्या करने की बात कर रहा था। उसकी बातो पर किसी ने ध्यान नही दिया। सभी को लग रहा था। लोगो का ध्यान खीचने के लिए ये ऐसे बोल रहा है। वेद ने मनोज को कुछ सामान देने की कोशिश की तब उसने मना कर दिया जबकि वेद का जन्म दिन मनाने की इच्छा नही थी मनोज ने ही जबरदस्ती उनका जन्मदिन मनाने पर उन्हें विवश किया था । किसी को मनोज का व्यवहार समझ नही आ रहा था।
वेद के जन्मदिन के कुछ दिन बाद मनोज ने इस दुनियाँ से प्रस्थान कर लिया। अब सबको उसके निराशावादी दृष्टिकोण का ध्यान आया। उसके मन से जीने की इच्छा ख़त्म हो चुकी थी। इसलिए वह सबके सामने ख़ुदकुशी की बाते कर रहा था। सिर्फ सुमन ही उसे दिलासा देने की कोशिश करती थी। बाकि सब उसकी भावनाओ से अनजान रहे। अब सभी जार -जार आंसू बहा रहे थे। उन्हें समझ नही आ रहा था। उनसे कहाँ गलती हुई। वह किस तरह मनोज को बचा सकते थे।
मनोज चार बहनो का प्यारा भाई था। सभी बहनो ने उसकी मदद करने की कोशिश की थी लेकिन सबको वह समझ नही पाया। उनकी मदद भी उसकी तरक्की नही करवा पा रही थी। वह निराशा के गर्त में डूबता जा रहा था। किसी की दिलासा उस पर असर नही कर रही थी आखिर वह सबको रोता बिलखता छोड़ कर इस दुनियाँ से चला गया।
सबसे बड़ा झटका वेद को लगा। उसने अपनी कमाई हुई सारी जमा -पूंजी उसके कर्जदारो को दे दी। लेकिन उसके बाद भी वह मनोज को जिन्दा रखने में सफल ना हो सका। यदि मनोज कुछ समय और जिन्दा रहता तो हालत बदल सकते थे। उसने वक्त के बदलने का इंतजार नही किया।
मनोज ऐसे बाप का बेटा था जिसकी मदद कभी किसी ने नही की थी क्योंकि उसका अपना कहने वाला दुनियाँ में कोई नही था। वह केवल अपने जुझारू पन और ना हारने की आदत के कारण आज तक जिंदगी का अपने हौंसले से सामना कर रहा था।
वेद रोते हुए कह रहे थे - मनोज जब मुझसे कह रहा था बाउजी आपका ये जन्मदिन में अवश्य मनाऊँगा। आखिर 75 साल कितने लोग देखते है। अगला जन्म दिन आपका केसा मनेगा कोई नही जानता। कोई रहता है या नही। में इसे अपने लिए समझ रहा था। मुझे क्या पता था। वह अपनी मौत के बारे में कह रहा है। मै उसे हमेशा बड़ -बोला समझता था। उसके आखिरी शव्द नही समझ पाया।
मनोज सबको अमिट दुःख देकर चला गया। उसे अब किसी तरह वापिस नही बुलाया जा सकता था। अब सबके पास रोने के सिबा दूसरा चारा नही था।
वह सबसे कहता -मै किसी दिन आत्महत्या कर लूंगा।
किसी को उसकी बात पर यकीन नही आता था क्योंकि वेद के परिवार ने कष्टो का सामना किया था। वेद ने कई दुर्घटनाओ का सामना करने के बाद भी अपने अंदर के जुझारूपन के कारण हर समस्या से बाहर निकल आये थे।इस कारण सब को लगता मनोज सबका ध्यान अपनी तरफ खीचने के लिए ऐसा बोलता है। ऐसे पिता का बेटा आत्महत्या नही कर सकता।
वेद का 75 जन्मदिन धूम धाम से मनाया जा रहा था। मनोज के चेहरे की सारी रौनक खत्म हो चुकी थी। उस दिन भी मनोज जिससे भी मिलता आत्महत्या करने की बात कर रहा था। उसकी बातो पर किसी ने ध्यान नही दिया। सभी को लग रहा था। लोगो का ध्यान खीचने के लिए ये ऐसे बोल रहा है। वेद ने मनोज को कुछ सामान देने की कोशिश की तब उसने मना कर दिया जबकि वेद का जन्म दिन मनाने की इच्छा नही थी मनोज ने ही जबरदस्ती उनका जन्मदिन मनाने पर उन्हें विवश किया था । किसी को मनोज का व्यवहार समझ नही आ रहा था।
वेद के जन्मदिन के कुछ दिन बाद मनोज ने इस दुनियाँ से प्रस्थान कर लिया। अब सबको उसके निराशावादी दृष्टिकोण का ध्यान आया। उसके मन से जीने की इच्छा ख़त्म हो चुकी थी। इसलिए वह सबके सामने ख़ुदकुशी की बाते कर रहा था। सिर्फ सुमन ही उसे दिलासा देने की कोशिश करती थी। बाकि सब उसकी भावनाओ से अनजान रहे। अब सभी जार -जार आंसू बहा रहे थे। उन्हें समझ नही आ रहा था। उनसे कहाँ गलती हुई। वह किस तरह मनोज को बचा सकते थे।
मनोज चार बहनो का प्यारा भाई था। सभी बहनो ने उसकी मदद करने की कोशिश की थी लेकिन सबको वह समझ नही पाया। उनकी मदद भी उसकी तरक्की नही करवा पा रही थी। वह निराशा के गर्त में डूबता जा रहा था। किसी की दिलासा उस पर असर नही कर रही थी आखिर वह सबको रोता बिलखता छोड़ कर इस दुनियाँ से चला गया।
सबसे बड़ा झटका वेद को लगा। उसने अपनी कमाई हुई सारी जमा -पूंजी उसके कर्जदारो को दे दी। लेकिन उसके बाद भी वह मनोज को जिन्दा रखने में सफल ना हो सका। यदि मनोज कुछ समय और जिन्दा रहता तो हालत बदल सकते थे। उसने वक्त के बदलने का इंतजार नही किया।
मनोज ऐसे बाप का बेटा था जिसकी मदद कभी किसी ने नही की थी क्योंकि उसका अपना कहने वाला दुनियाँ में कोई नही था। वह केवल अपने जुझारू पन और ना हारने की आदत के कारण आज तक जिंदगी का अपने हौंसले से सामना कर रहा था।
वेद रोते हुए कह रहे थे - मनोज जब मुझसे कह रहा था बाउजी आपका ये जन्मदिन में अवश्य मनाऊँगा। आखिर 75 साल कितने लोग देखते है। अगला जन्म दिन आपका केसा मनेगा कोई नही जानता। कोई रहता है या नही। में इसे अपने लिए समझ रहा था। मुझे क्या पता था। वह अपनी मौत के बारे में कह रहा है। मै उसे हमेशा बड़ -बोला समझता था। उसके आखिरी शव्द नही समझ पाया।
मनोज सबको अमिट दुःख देकर चला गया। उसे अब किसी तरह वापिस नही बुलाया जा सकता था। अब सबके पास रोने के सिबा दूसरा चारा नही था।
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