# apman ka ghunt

      सुकन्या मनोज की शादी के सिलसिले में एक लड़की देखने गयी थी। वहाँ लड़की वालो से मिलवाने वाले सुकन्या के करीब से जानने वाले थे। सुकन्या को वह लड़की पसंद आ  गयी। बिचोलिये ने घर पर ही  बता दिया था। लड़की बहुत गोरी और सुन्दर है। आप इस लड़की की सुंदरता में कोई नुक्स नही निकाल पाओगे। उन्हें लड़की अच्छी लगी। उन्होंने अगले दिन विचार विमर्श करके जबाब देने के लिए कहा।
    लड़की वाले कहने लगे-आप अभी जबाब दे दीजिये। हमें आपके जबाब का इंतजार हे।
     पहली बार सुकन्या इस लड़की को पसंद करवाने के लिए पुरे परिवार के साथ आई थी। उनके पास कोई बहाना  नही था। उनके हिसाब से लड़की ठीक थी। सुकन्या और वेद ने आपस मे विचार करके लड़की को पसंद कर लिया।  उन्होंने  लड़की के लिए हाँ  में जबाब दे दिया।
      लड़की की पसंद के बारे में पता चलते ही लड़की वालो ने उनसे गॉद  भराई की रस्म करने के लिए कहा।        अब सुकन्या और वेद ने कई बहाने बनाये -हम इस के लिए तैयार होकर नही आये। ये हमारा पहला लड़का है। हमारे मन में  अपने  बेटे को लेकर कई  इच्छाए है वह सही ढंग से पूरा करना चाहते है। अचानक हमें ये रस्मे निभाना उचित नही लग रहा। आप हमें समय दीजिये। हम पुरे प्रबंध के साथ रस्मे निभाएंगे।
    लड़की वाले उनके जबाब से संतुष्ट नही थे। उन्होंने कहा - आज के  समय जेब में रूपये होने चाहिए। सामान  हर जगह से ख़रीदा जा सकता है। हम किसी वीराने में नही रहते। यहाँ भी बाजार है। आपको जो चाहिए सारा सामान इसी बाजार में मिल जायेगा। आपको किसी तरह की परेशानी नही होगी।
    वेद पर उन्होंने इतना अधिक दबाब डाला उनसे ना कहना मुश्किल हो गया। वे उनके घरवालो के साथ बाजार सामान खरीदने  चले गए। उस रस्म की जरूरत के अनुसार कुछ सामान लेकर वेद और सुकन्या वापस आ  गए।
    कुछ समय के अंदर सबने रस्मे शुरू कर दी। सुकन्या बहुत गोरी थी उस पर लाल रंग बहुत अच्छा लगता था। यह लड़की भी सुकन्या के सामान बहुत गोरी थी। इसलिए वेद दुल्हन के लिए भी लाल रंग की साड़ी  लाये। दुल्हन लाल रंग की साड़ी  में फब  रही थी।उसे सबलाल  रंग की साड़ी में देखकर  सराह  रहे थे।
     लेकिन लड़की की माँ लाल रंग की साड़ी  को देख कर भड़क गयी। उसने कहा -कोई लड़की के लिए लाल रंग की साड़ी  लाता  है। ये रंग अच्छा नही है। आजकल लाल रंग का फैशन नही है। आपने लाल रंग की साड़ी  लाकर   सही नही किया। आपको कोई और रंग लाना चाहिए था। लाल रंग शादी के बाद पहना जाता है। आपने अभी से ये रंग ला  दिया इसे दिखाते हुए हमें शर्म आएगी।
    सुकन्या ने कहा -मनोज  के पिताजी को  ये रंग बहुत पसंद है। वे आपकी लड़की का  गोरा रंग देखकर अपनी पसंद की साड़ी  लाये  हे। आपको इनकी पसंद पर इतना नाराज नही होना चाहिए। आपकी बेटी पर ये रंग आप खुद देखिये कितना खिल रहा है। आप अपनी बेटी की सुंदरता को एक बार सही ढंग से निहार कर देखिये। आपकी नाराजगी बिलकुल मिट जाएगी।
    लड़की की माँ बोली -शादी से पहले यह इस साड़ी  को पहन नही सकेगी। इस लिए में कह रही थी।
     इसके बाद मेकअप  का सामान देखकर भी वह अनुचित शब्दों का प्रयोग करने लगी। उसने कहा -ये सस्ता सामान लेकर  आप क्यों आये। ऐसा सामान हमारी बेटी इस्तेमाल नही करती। आपको महँगा सामान लाना चाहिए था। इससे मेरी बेटी की त्वचा खराब हो जाएगी।
      इसके बाद  लड़की वाले कहने लगे -आप इसे किसी सोने की चीज भी पहना दो। तब हमें लगेगा रिश्ता पक्का हो गया।
     उस लड़की को सुकन्या अपनी पहनी हुई जंजीर उसके गले में डालने लगी। उनके पास इस समय कोई और सोने की चीज नही थी। उसकी माँ के चेहरे की नाराजगी माला ने देख ली थी उसके मुँह  से निकले शब्दों के कारण सबका मन ख़राब हो रहा था।
    उनकी बेटी माला  ने कहा - माँ आप शादी में सोने की जंजीर दे देना। अभी ये मेरी अंगूठी आप इसे पहना दो।
     सुकन्या को उसकी बात उचित लगी। उसने अंगूठी पहना कर रस्म पूरी कर दी।
     इसके बाद सब अपने घर आ  गए। सबने लड़कीवालों के घर के बारे में बात करनी शुरू की। सबको उनका व्यवहार अनुचित लगा। सुकन्या को उनकी बातो के कारण बहुत गुस्सा आ  रहा था।
    उसने कहा -उन्हें पता था।अभी तो हम सिर्फ लड़की देखने आए थे। हमारे  पास कोई  इंतजाम नही है। रिश्ता सही तरह से पक्का भी नही हुआ। इन्होने हमारी सभी चीजो में नुक्स निकाल दिया। किसी बात को मन में दबाने की इन्होने जरूरत नही समझी। जब ये रिश्तेदार बन जायेंगे। तब ये हमारा बुरा हाल कर देंगे। में सारे  रस्ते सोचती आ  रही हूँ। उसका रिश्ता मुझे इतना सुनाने का कैसे हो गया। मै लड़के की माँ होकर चुपचाप सुनती रही। उसने एक बार भी सोचने की जरूरत नही समझी उसकी कही बात दूसरे को बुरी भी लग सकती है। जब माँ का अपने शव्दो पर नियंत्रण नही है। तो वह अपनी बेटी को भी यही शिक्षा   देती होगी।  मै इस लड़की से मनोज का किसी हालत में रिश्ता नही होने दूँगी। इसकी माँ मेरा जिन मुहाल कर देगी। उसका अपनी जबान पर कोई नियंत्रण नही है। मुझे ऐसे सम्बन्धी नही चाहिए।
     वेद ने कहा -हम रस्मो में इतना खर्च  कर आये  है। हमें काफी नुकसान उठाना पड़ेगा। समाज वाले भी इस बारे में गलत कहेंगे।
    सुकन्या बोली -मै इस समय का नुकसान उठाना बर्दास्त कर सकती हूँ। सारी जिंदगी उस औरत को सहन करना मेरे बस का नही है। उसे अपनी बेटी की सुंदरता का बहुत घमंड लगता है। उसे पता नही चला हमारे  घर में सुंदरता की कमी नही है। तब भी इतना अधिक बोलती रही।
     सुकन्या के शब्दों का असर सब पर हो रहा था। लेकिन इतना बड़ा कदम उठाने की हिम्मत किसी में नही हो रही थी। सुकन्या को समझाना सब के लिए मुश्किल हो रहा था।
    अन्तत  सभी ने लड़की वालो को सारी  बात बता कर ना कहलवा दिया।अब सबको लड़की की माँ के शव्दो पर ध्यान गया। उनको भी माँ के  शब्द अनुचित   लगे। उन्होंने उनसे माफ़ी मागने का प्रस्ताव रखा। लेकिन सुकन्या राजी नही हुई।
    सुकन्या बोली -अभी वह रिश्ता जोड़ने के लिए माफ़ी मांग लेगी। लेकिन उसको इसी तरह से दुसरो को अपमानित करने की आदत होगी। इस रिश्ते को जोड़कर मै  सारी जिंदगी अपमान का घूंट पीना नही चाहती। सबके अनुनय -विनय के बाद भी सुकन्या ने  इस  रिश्ते  को तोड़ दिया।
    उसने कहा -जब माँ को अपनी बेटी की सुंदरता को लेकर इतना घमंड है। तो उसकी बेटी में भी उसने कुछ तो घमंड भर दिया होगा। उसकी बेटी हमारा जीना हराम कर देगी।
    सुकन्या के इस तरह अड़ जाने के कारण मनोज का उस परिवार से रिश्ता नही जुड़ सका। यदि सुकन्या जरा सी नरमी दिखाती तो किसी में इतना सख्त कदम उठाने का जज्बा नही था।
      इसलिए कहते है -माँ अपने बच्चो की भलाई के लिए हर मुसीबत का डट  कर सामना  करती है। ऐसे में माँ के सामान बलबान कोई नही होता। 

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