कुछ दिन पहले दिल्ली पुलिस ने हिम्मत एप निकाला था। मेरी बेटी ने अपनी सुरक्षा के लिए इसे अपने मोबाइल में डॉउनलोड कर लिया। उसने कभी मुसीबत के बक्त इस्तेमाल करने के लिए सोचा था। लेकिन अचानक दफ्तर से आते हुए उससे गलती से इसका बटन दब गया। उसे अपनी गलती का पता नही चला इसका परिणाम उसे शीघ्र पता चल गया।
कुछ समय बाद उसे दिल्ली पुलिस से फोन आया-अपने हमें कैसे याद किया।
मेरी बेटी सुधा ने उन्हें एकदम बता दिया -ये बटन गलती से दब गया है। मुझे किसी तरह की परेशानी नही है।
उसके बाद वह भूल गयी उससे कोई गलती हुई है। उसके कुछ समय बाद उसके फोन की बैटरी ख़त्म हो गयी।
मुझे लगता है।
हिम्मत का बटन कई जगह से जुड़ा हुआ है। उन्होंने फोन के द्वारा उसकी बहन चंदा को सुधा के साथ कुछ गलत हुआ है। इसका सन्देश भेज दिया। चंदा अपने कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी। पढ़ाई के बाद उसने जहाँ से सन्देश आया था। उस फोन पर बात करने की कोशिश की। तो वह नंबर नही मिला। उसके बाद उसने सुधा को फोन मिलाने की कोशिश की सुधा का नंबर भी नही मिला। उसे बहुत डर लगने लगा। उसने सोचा सुधा के साथ बहुत गलत हो गया है। तभी वह फोन नही उठा रही। उसने अपने अभिभावकों को फोन मिलाया।
फोन पर उसने उन्हें रोते हुए बताया -मम्मी दीदी का फोन नही मिल रहा है। पुलिस वालो ने मुझे फोन किया है। मम्मी मुझे कुछ समझ नही आ रहा मै क्या करू। आप कहाँ हो।
।मेने कहा - हम वैशाली में है।
चंदा बोली -मम्मी आप जल्दी घर पहुँचो। दीदी का कुछ पता नही चल रहा है।
उसके बाद मेने अपने पति रमेश को इस घटना के बारे में बताया। रमेश भी सुधा और चंदा को फोन मिलाने लगे। इधर में भी दोनों को फोन मिला रही थी। रमेश की चंदा के फोन पर बात हुई ।
उसके साथियो ने बताया - उसकी हालत अच्छी नही थी। उसकी सहेलिया और अद्यापक उसे समझाने की कोशिश कर रहे थे। वह फोन उठाने की हालत में नही थी।
उसकी अद्यापक ने कहा- चंदा बहुत रो रही है। उसे हम किसी के साथ घर भेज रहे है। आप चिंता मत कीजिये
इतना सुनते ही हमारी ऊपर की साँस ऊपर और नीचे की साँस नीचे। हमें कुछ समझ नही आ रहा था। ऐसे में हम क्या करे। मुझे केवल पुलिस याद रहा। हम जैसे घरो में पुलिस से कम वास्ता पड़ता है। हमें बुरे वक्त के साथ ही पुलिस दिखाई देती है। हमें पूरा यकीन हो गया सुधा के साथ दुर्घटना हो गयी है या उसका अपहरण हो गया है। मेने वही से पुलिस का १०० नंबर मिला दिया।
वहाँ से मुझे जबाब मिला-अभी आप यू, पी , में है। आपके साथ दुर्घटना दिल्ली में हुई है। आप कृपया दिल्ली पुलिस से बात करे।
मेने उनसे कहा -हमें समझ नही आ रहा। हम किससे बात करे। आप कृपया हमें कोई नंबर बता दीजिए। जिससे हम मालूम कर सके।
उन्होंने हमें दिल्ली पुलिस का नंबर दे दिया। उन्होंने हमारी हरसंभव मदद करने का आश्वासन दिया।
दिल्ली पुलिस से जब हमारी बात हुई। उन्होंने हमें तसल्ली बक्श जबाब दिया। मै पुरे समय फोन पर लोगो से पूछताछ करती रही। इस बीच आधा घंटा बीत गया।
इतने में चंदा का फोन आया - दीदी घर पर पहुंच गयी है। आप परेशान मत होना।
मेने तब दिल्ली पुलिस को सुधा के सकुशल मिल जाने की बात बता दी। इसके बाद हम निश्चिन्त हो गए। लेकिन हमें बहुत हैरानी हुई जब हमें कई बार दिल्ली पुलिस का इसके बाद भी फोन आया। आपकी बेटी सुरक्षित पहुंच गयी है। मेरे दिमाग में दिल्ली पुलिस की ख़राब याद बसी हुई थी वह एकदम बदल गयी। दिल्ली पुलिस आम जनता के साथ अच्छा सलूक कर रही है।
लेकिन एक फरियाद दिल्ली पुलिस से है -यदि उन्हें सब कुछ ठीक होने का पता चल गया था तब उन्हें हमें भी बता देना चाहिए था।
हमारा काफी समय बुरा बीता यदि हमें सब कुछ ठीक पता चल जाता तब हम इतने अधिक परेशान ना होते। में दिल्ली पुलिस की मदद के लिए आभारी हूँ।
कुछ समय बाद उसे दिल्ली पुलिस से फोन आया-अपने हमें कैसे याद किया।
मेरी बेटी सुधा ने उन्हें एकदम बता दिया -ये बटन गलती से दब गया है। मुझे किसी तरह की परेशानी नही है।
उसके बाद वह भूल गयी उससे कोई गलती हुई है। उसके कुछ समय बाद उसके फोन की बैटरी ख़त्म हो गयी।
मुझे लगता है।
हिम्मत का बटन कई जगह से जुड़ा हुआ है। उन्होंने फोन के द्वारा उसकी बहन चंदा को सुधा के साथ कुछ गलत हुआ है। इसका सन्देश भेज दिया। चंदा अपने कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी। पढ़ाई के बाद उसने जहाँ से सन्देश आया था। उस फोन पर बात करने की कोशिश की। तो वह नंबर नही मिला। उसके बाद उसने सुधा को फोन मिलाने की कोशिश की सुधा का नंबर भी नही मिला। उसे बहुत डर लगने लगा। उसने सोचा सुधा के साथ बहुत गलत हो गया है। तभी वह फोन नही उठा रही। उसने अपने अभिभावकों को फोन मिलाया।
फोन पर उसने उन्हें रोते हुए बताया -मम्मी दीदी का फोन नही मिल रहा है। पुलिस वालो ने मुझे फोन किया है। मम्मी मुझे कुछ समझ नही आ रहा मै क्या करू। आप कहाँ हो।
।मेने कहा - हम वैशाली में है।
चंदा बोली -मम्मी आप जल्दी घर पहुँचो। दीदी का कुछ पता नही चल रहा है।
उसके बाद मेने अपने पति रमेश को इस घटना के बारे में बताया। रमेश भी सुधा और चंदा को फोन मिलाने लगे। इधर में भी दोनों को फोन मिला रही थी। रमेश की चंदा के फोन पर बात हुई ।
उसके साथियो ने बताया - उसकी हालत अच्छी नही थी। उसकी सहेलिया और अद्यापक उसे समझाने की कोशिश कर रहे थे। वह फोन उठाने की हालत में नही थी।
उसकी अद्यापक ने कहा- चंदा बहुत रो रही है। उसे हम किसी के साथ घर भेज रहे है। आप चिंता मत कीजिये
इतना सुनते ही हमारी ऊपर की साँस ऊपर और नीचे की साँस नीचे। हमें कुछ समझ नही आ रहा था। ऐसे में हम क्या करे। मुझे केवल पुलिस याद रहा। हम जैसे घरो में पुलिस से कम वास्ता पड़ता है। हमें बुरे वक्त के साथ ही पुलिस दिखाई देती है। हमें पूरा यकीन हो गया सुधा के साथ दुर्घटना हो गयी है या उसका अपहरण हो गया है। मेने वही से पुलिस का १०० नंबर मिला दिया।
वहाँ से मुझे जबाब मिला-अभी आप यू, पी , में है। आपके साथ दुर्घटना दिल्ली में हुई है। आप कृपया दिल्ली पुलिस से बात करे।
मेने उनसे कहा -हमें समझ नही आ रहा। हम किससे बात करे। आप कृपया हमें कोई नंबर बता दीजिए। जिससे हम मालूम कर सके।
उन्होंने हमें दिल्ली पुलिस का नंबर दे दिया। उन्होंने हमारी हरसंभव मदद करने का आश्वासन दिया।
दिल्ली पुलिस से जब हमारी बात हुई। उन्होंने हमें तसल्ली बक्श जबाब दिया। मै पुरे समय फोन पर लोगो से पूछताछ करती रही। इस बीच आधा घंटा बीत गया।
इतने में चंदा का फोन आया - दीदी घर पर पहुंच गयी है। आप परेशान मत होना।
मेने तब दिल्ली पुलिस को सुधा के सकुशल मिल जाने की बात बता दी। इसके बाद हम निश्चिन्त हो गए। लेकिन हमें बहुत हैरानी हुई जब हमें कई बार दिल्ली पुलिस का इसके बाद भी फोन आया। आपकी बेटी सुरक्षित पहुंच गयी है। मेरे दिमाग में दिल्ली पुलिस की ख़राब याद बसी हुई थी वह एकदम बदल गयी। दिल्ली पुलिस आम जनता के साथ अच्छा सलूक कर रही है।
लेकिन एक फरियाद दिल्ली पुलिस से है -यदि उन्हें सब कुछ ठीक होने का पता चल गया था तब उन्हें हमें भी बता देना चाहिए था।
हमारा काफी समय बुरा बीता यदि हमें सब कुछ ठीक पता चल जाता तब हम इतने अधिक परेशान ना होते। में दिल्ली पुलिस की मदद के लिए आभारी हूँ।
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