# your desire is paramount

             अपनी इच्छा सर्वोपरि 

  कुछ लोग सामाजिक नियम कायदो को समझते है। लेकिन अपनी जरूरतों के कारण लाचार  हो जाते है।  वे आसपास नजर डालने लगते है। उन्हें घर की औरतो के साथ मुँह काला  करना शोभा नहीं देता। वे ही बाहर की औरतो  की  तरफ  बढ़ते है। 

       उन्हें पता होता है। घर में यदि किसी की बहन या  रिश्तेदार पर निगाहे डाली तब पिटाई  और रुसवाई  का डर  हमेशा बना रहेगा। उसके प्रति जिम्मेदार लोग उसे कहीं का नहीं छोड़ेंगे। लेकिन ये ऐसा फल है जिसके बिना रहना मुश्किल हो जाता है।लोग शिकारी की तरह घात  लगाए रहते है। जहाँ अकेली लड़की सुनसान रास्ते  पर  दिखी, वे अपना नियंत्रण खो बैठते है  

        भले ही ऐसे मामले 5 %  होते है। लेकिन खबरों में छाये रहते है। कोई भी संचार माध्यम इनसे बचा नहीं रहता। अपने इस कार्य के बाद भले ही बदनामी के डर  से उस लड़की को मौत की गोद  में सुलाना पड़े लेकिन अपनी इच्छा सर्वोपरि होती है। 

       ऐसे मामले आजकल खबरों में बहुत ज्यादा आ रहे है। क्योंकि अब लड़की के घर वाले इसकी रिपोर्ट लिखवाने लगे है। उन्हें लड़की की रुसवाई से ज्यादा उसे न्याय दिलवाना अच्छा लगने लगा है। 

           तब भी किसी ताकतवर इंसान का कृत्य अभी भी सामने नहीं आ पाता  हेै। भारत में जितने बलात्कार होते है उसके मुकावले  रिपोर्ट  केवल 25 % की लिखवाई  जाती है। बाकि लड़की के  भविष्य के बारे में सोच के चुप्पी लगा ली जाती है। ऐसी खबर आने के बाद इससे कौन शादी करेगा सारी  जिंदगी हम इसे किस तरह अपने घर में रख  पाएंगे। समाज में हमारी नाक  नीची हो जाएगी आदि ।   

      दिव्यांग और  लावारिस लड़कियों पर सबकी नजर होती है। क्योंकि उनके प्रति जिम्मेदारी लेने वाले नहीं होते। वे जहां भी, जिसके साथ  रह रही होती है। वे उन्हें बोझ के सामान लग रही होती है। वे अपने भाग्य को कोस रहे होते है।   ये उसके आसपास वाले भी समझते है. लोगो की मानसिकता आसानी से उपलब्ध रहने वालो पर पहले जाती है। ऐसी लड़कियों के साथ सबसे ज्यादा बलात्कार होते है।  जिनकी सुनवाई कहीं नहीं होती है।  

         भारत में ऐसे मामले थाने  तक केवल 4000  तक पहुंच पाते  है। जबकि अमरीका जैसे देश में 70000  तक पहुंचते है। बलात्कार के मामले भारत के आलावा सभी देशो में फैले होते है। ये इंसानी फितरत है। जो नहीं मिल पा  रहा है उसे हर हालत में हासिल करना है। इसके लिए भले ही सामाजिक रुसवाई का सामना करना पड़े। या मौत को गले लगाना पड़े। सब मंजूर है। लेकिन अपनी जरूरत सबसे पहले है। बाद की बाद में देखेंगे। 

         इस मामले में जानवर और इंसान दोनों एक श्रेणी में आ जाते है। वे  अपनी इच्छाओ पर नियंत्रण करने में असमर्थ हो जाते है। 

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