#DIFFERENCE BETWEEN EMPATHY OR SYMPATHY

          DIFFERENCE  BETWEEN     EMPATHY OR    SYMPATHY  

      हम सबसे सिम्पथी  चाहते है। सारी  जिंदगी सहानुभूति पाने की कोशिश करते रहते है। लेकिन सभी लोग हमे मन के मुताबिक प्यार दुलार नहीं कर पाते। जिसे पाने के लिए हम तरस  रहे होते है। हमें सभी के अंदर कमियां नजर आ रही होती है। हम हमेशा चाहते है सामने वाला हम जैसा चाहते है वैसा करे। यदि उसके मुताबिक नहीं हो पाता तब हम उसके द्वारा किये गए सारे अच्छे   कामो को नकारने में देर नहीं लगाते  है। उसे छोड़ने  से भी नहीं डरते।
         बहुत ज्यादा चिड़चिड़े और दुनियां को कोसने में देर नहीं लगाते। हम नहीं सोच पाते  जिनके बारे में अपशब्द बोल रहे है। उनके अंदर भी दिल है जो प्यार और दुलार पाना चाहता है। दुनियां हमारे आलावा भी है। हम भी अन्य को दुःख दे सकते है  
       जिसके साथ हम रहते है। यदि आप ताकतवर और प्रसिद्ध हो तब तुम्हे दुःख देने से पहले लोग कई बार सोचते है। लेकिन कई बार सामने वाले की भी मजबूरी होती है। जब वह हमारे मन मुताबिक नहीं कर पाता।
           हमारी और सामने वाले की हालत में बहुत अंतर् होता है। उन हालातो के बीच  में रहते हुए हम भी शायद उसके अनुसार ही निर्णय ले। लेकिन हम सामने वाले के निर्णय को अपने हालातो के मद्देनजर रखकर तय करते है। इस कारण हम सही तरीके से इंसाफ नहीं कर पाते। 
      बाद में  सामने वाले और खुद को सारी  जिंदगी कोसते रहते है। जब हमने ऐसा कदम नहीं उठाया ,तब तुमने क्यों उठाया। तुमने उठाया इसलिए  तुम सबसे बुरे  इंसान  हो। तुम्हे तुम्हारी गलती के लिए माफ़ नहीं किया जा सकता। 
       तुम्हे  भले ही  माफ़ न करने के कारण हम सारी  जिंदगी तुम्हारी और  अपनी भी दुःख में बीता दे।  लेकिन तुम्हे  माफ़ नहीं करेंगे ।
            मैं कभी भी निर्णय लेने से पहले जिस इंसान से नफरत करती हूँ पहले खुद को उसकी जगह रख कर देखती हूँ। हर इंसान में कमी होती है। हर इंसान सारी  जिंदगी सही निर्णय नहीं ले सकता। सभी से गलतियां होती है।  जब गलतियां समाज के सामने आ जाती है। सामने वाला उसके लिए माफ़ी मांग ले। तब उसे एक बार मौका जरूर देना चाहिए। 
         कुछ गलतियां चोरी -छिपे की जाती है। जिसके बारे में सभी सोचते है ये किसी को पता नहीं चलेंगी। आपने सुना होगा निषिद्ध फल खाने में बहुत मीठा होता  है। लेकिन हम अपने आप पर नियंत्रण इसलिए रखते है क्योंकि इसके उजागर होने पर जिस निंदा का सामना करना पड़ता है। उसे सहन करना हर किसी के बस का नहीं होता है।           जब तक उन्हें उजागर नहीं करो तब तक इंसान बेधड़क ऐसा करता जायेगा लेकिन समाज के सामने आने पर लोग अपने को लोगो की निगाहो से गिरते हुए देखना पसंद नहीं करते। क्योंकि सभी अच्छे काम हम समाज के सामने खुद को सही साबित करने के लिए करते है। अच्छे कामो को करने के लिए हमें अपने तन और मन  को बहुत तकलीफ देनी पड़ती है।  इसलिए लोगो की गलतियां समाज में लाने  के बाद उन्हें एक बार और मौका दिया जाना चाहिए। 

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